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इस वजह से नजदीक आए हैं मुलायम-मोदी

Sun, 22 Feb 2015 05:34 PM IST
राजेन्द्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेन्द्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 22 Feb 2015 05:34 PM IST
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Modi attends Mulayam's grandson tilak ceremony, know why.

सांसद पौत्र तेज प्रताप सिंह के तिलकोत्सव के बहाने सैफई में शीर्ष राजनीतिज्ञों, फिल्मी हस्तियों और उद्योगपतियों के ग्रैंड शो से सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का कद और बढ़ गया है।

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उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री समेत धुर विरोधी प्रमुख भाजपा नेताओं को बुलाकर साबित कर दिया है कि उनके लिए निजी रिश्ते सियासत से ऊपर हैं। नए आभा मंडल के साथ सपा मुखिया अब होली के बाद जनता परिवार पर बहुप्रतीक्षित एकता का रंग चढ़ाएंगे।
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मैनपुरी के सांसद तेज प्रताप के तिलक समारोह में खास से आम सभी जुटे। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के साथ ही कई मंत्री, राज्यपाल, प्रमुख दलों के नेता, यूपी के मंत्री, अफसर, सांसद, पार्टी नेताओं और विधायकों समेत हजारों लोग इस हाईप्रोफाइल समारोह के गवाह बने।
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मुलायम ने न केवल अपने राजनीतिक विरोधियों को आमंत्रण दिया बल्कि वे इसमें शरीक भी हुए। सपा मुखिया ने अपने गांव में किसी पारिवारिक कार्यक्रम में इतना बड़ा जमावड़ा करके साबित कर दिया है कि वह निजी संबंधों को सियासी रिश्तों से अलग रखते हैं।

रिश्तों में बंधे दो दिग्गज सियासी परिवार

Modi attends Mulayam's grandson tilak ceremony, know why.

तेज प्रताप और राजलक्ष्मी की शादी के जरिये यूपी और बिहार के दो दिग्गज सियासी परिवार नजदीक आ गए हैं। राजनीति में मुलायम की मजबूत पकड़ का अंदाजा इसी से लग सकता है कि उनके परिवार के छह सदस्य सांसद हैं।

उनका बेटा यूपी जैसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री है और वह खुद सपा के मुखिया हैं। उधर, लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। हालांकि उनके परिवार का कोई सदस्य इस बार लोकसभा चुनाव नहीं जीत सका लेकिन बिहार में उनकी राजनीतिक हैसियत बरकरार है।

लालू को संबंधों का ज्यादा लाभ

वैसे तो दोनों परिवारों को इस रिश्तेदारी का लाभ मिलेगा लेकिन ज्यादा लाभ में लालू प्रसाद रहेंगे। अदालत से सजा हो जाने के बाद लालू फिलहाल चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। लोकसभा चुनाव में भी उनके परिवार के सदस्य हार गए।

ऐसे में नीतीश से दोस्ती और मुलायम परिवार से रिश्तेदारी से उनका राजनीतिक कद बढ़ा है। यदि जनता परिवार की एकता कायम हुई तो बिहार की सियासत में वह फिर मजबूती से ताल ठोकेंगे। जबकि जनता परिवार की एकता के बाद प्रस्तावित नई पार्टी के मुखिया के नाते मुलायम का कद और बढ़ जाएगा।

निभाएंगे बड़ी जिम्मेदारी, जबकि एक पूरी कर चुके

Modi attends Mulayam's grandson tilak ceremony, know why.

मुलायम सिंह पर जनता परिवार से जुड़े दलों व नेताओं को जोड़ने की जिम्मेदारी है। बिहार विधानसभा के चुनाव इस साल के आखिर में होंगे। उससे पहले लालू और नीतीश समेत जनता परिवार में शामिल रहे दलों को एक करने का काम मुलायम को सौंपा गया है।

वह सभी दलों के संपर्क में हैं। रविवार को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले लेंगे। संभावना है कि इसके बाद जनता परिवार के विलय की प्रक्रिया शुरू होगी। 26 फरवरी को तेज प्रताप की शादी के चलते मुलायम अभी यह कसरत पूरी नहीं कर पाएंगे। इसके बाद होली है। उम्मीद है, जनता परिवार पर एका का रंग होली के बाद ही चढ़ेगा।

मुलायम निभाते हैं परिवार मुखिया की जिम्मेदारी
तेज प्रताप के पिता रणबीर सिंह की कई साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनकी स्मृति में सैफई महोत्सव कराया जाता है। उनके दादा रतन सिंह की गत लोकसभा चुनाव के दौरान मृत्यु हो गई थी। रतन सिंह, सपा मुखिया मुलायम सिंह के बड़े भाई थे।

तेज प्रताप के पिता और सगे दादा नहीं है लेकिन मुलायम ने कभी उन्हें दादा की कमी महसूस नहीं होने दी। उनकी शिक्षा देश के अच्छे स्कूलों में कराई और फिर मास्टर डिग्री के लिए विदेश भेजा। 2011 में उन्हें सैफई का निर्विरोध ब्लाक प्रमुख बनाया और 2014 में अपनी सीट मैनपुरी के उपचुनाव में जिताकर लोकसभा भेजा।

मोदी को बुलावा, मायावती से दूरी

Modi attends Mulayam's grandson tilak ceremony, know why.

पौत्र के तिलक में सपा मुखिया ने अपने राजनीतिक विरोधी प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह समेत सभी क्षेत्रों की हस्तियों को बुलाया लेकिन बसपा सुप्रीमो मायावती से दूरी बनाई रखी।

माना जा रहा है कि यूपी की सियासत को दो ध्रुवीय बनाने के लिए भी मायावती से किनाराकशी की गई है। चर्चा है कि सपा-बसपा के रिश्तों में सिर्फ कड़वाहट ही नहीं है बल्कि निजी तौर पर भी रिश्तों में गरमाहट नहीं है।

रिश्तों को सहज बनाना चाहते हैं मोदी

संसद सत्र से ठीक पहले राज्यसभा में समीकरण साधने की मजबूरी हो, भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर अन्ना हजारे के आंदोलन का असर या कोई और वजह, प्रधानमंत्री मोदी ने मुलायम के आमंत्रण पर सैफई पहुंचने में नानुकर नहीं की।

उन्होंने मुलायम परिवार से काफी आत्मीयता दिखाई। इसे विरोधियों के साथ रिश्तों को सहज बनाने की उनकी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

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