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आपकी लाइफस्टाइल भी है ब्रेस्ट कैंसर के लिए जिम्मेदार
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बदलता लाइफस्टाइल भी ब्रेस्ट कैंसर के लिए जिम्मेदार
- महिलाओं में बढ़ रही ब्रेस्ट कैंसर की समस्या
अचानक ब्रेस्ट का साइज बड़ा लगने लगे, किसी प्रकार की लंप या गांठ लगे, वहां की स्किन में बदलाव दिखे या निपल से डिस्चार्ज हो रहा हो तो ये लक्षण ब्रेस्ट कैंसर के हो सकते हैं। देश की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की समस्या सर्वाधिक है और यह तेजी से बढ़ रही है। फैमिली हिस्ट्री के अलावा वेस्टर्न लाइफस्टाइल इसकी एक बड़ी है।
यह जानकारी दिल्ली से आए आंकोलॉजी सर्जन व ब्रेस्ट कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. देवरत आर्या ने मंगलवार को दी। वे इनरव्हील क्लब ऑफ लखनऊ की ओर से निरालानगर स्थित रोटरी कम्युनिटी सेंटर में ‘ब्रेस्ट कैंसर डिटेक्शन एंड अवेयरनेस प्रोग्राम’ में शामिल हुए थे।
डॉ. देवरत ने बताया कि आजकल महिलाएं फास्टफूट, एल्कोहल, सिगरेट का सेवन कर रही हैं, देर से शादी और डिलिवरी, ब्रेस्टफीडिंग में कमी के कारण कैंसर बढ़ रहा है।
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साल में एक बार मैमोग्राफी व सेल्फ एग्जामिनेशन जरूरी
डॉ. आर्या ने बताया कि हर महिला को साल में एक बार मैमोग्राफी टेस्ट जरूर कराना चाहिए। वहीं समय-समय पर सेल्फ एग्जामिनेशन भी करते रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि देश में हर साल ब्रेस्ट कैंसर के 1.70 लाख नए मरीज मिलते हैं। करीब 85000 की मौत भी हो जाती है।
कम उम्र में भी हो रहा ब्रेस्ट कैंसर
दिल्ली से आए दूसरे विशेषज्ञ आंकोलॉजी सर्जन डॉ. अमीष चौधरी ने बताया कि पहले यह मर्ज 50 से 55 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं में होता था, लेकिन अब यह उम्र घट कर 40-45 हो गई है। यहां तक 24-25 वर्ष की युवतियों में भी ब्रेस्ट कैंसर की शिकायत आने लगी है। उन्होंने कहा अगर फर्स्ट स्टेज पर पता चल जाए तो इसका संपूर्ण इलाज संभव है। वहीं बायोपसी को लेकर लोगों में भ्रम है कि इससे कैंसर बढ़ जाता है। लेकिन यह गलत है।
जेनेटिक टेस्टिंग जरूरी
डॉ. अमीष ने बताया कि लाइफस्टाइल में सुधार तो जरूरी है ही। इसके अलावा ऐसी महिलाएं जिनके किसी भी ब्लड रिलेशन में किसी को ब्रेस्ट या ओवेरियन कैंसर या मल्टीपल कैंसर की शिकायत रही हो, या किसी पुरुष को ब्रेस्ट कैंसर की शिकायत रही हो तो उनमें इसका रिस्क कई गुना बढ़ जाता है। ऐसी महिलाओं को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। कार्यक्रम में क्लब की अध्यक्ष वंदना अग्रवाल, कोषाध्यक्ष मधु भार्गव, आईएसओ सजिता गर्ग, एडिटर सुधा गुप्ता समेत बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं।
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- महिलाओं में बढ़ रही ब्रेस्ट कैंसर की समस्या
अचानक ब्रेस्ट का साइज बड़ा लगने लगे, किसी प्रकार की लंप या गांठ लगे, वहां की स्किन में बदलाव दिखे या निपल से डिस्चार्ज हो रहा हो तो ये लक्षण ब्रेस्ट कैंसर के हो सकते हैं। देश की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की समस्या सर्वाधिक है और यह तेजी से बढ़ रही है। फैमिली हिस्ट्री के अलावा वेस्टर्न लाइफस्टाइल इसकी एक बड़ी है।
यह जानकारी दिल्ली से आए आंकोलॉजी सर्जन व ब्रेस्ट कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. देवरत आर्या ने मंगलवार को दी। वे इनरव्हील क्लब ऑफ लखनऊ की ओर से निरालानगर स्थित रोटरी कम्युनिटी सेंटर में ‘ब्रेस्ट कैंसर डिटेक्शन एंड अवेयरनेस प्रोग्राम’ में शामिल हुए थे।
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डॉ. देवरत ने बताया कि आजकल महिलाएं फास्टफूट, एल्कोहल, सिगरेट का सेवन कर रही हैं, देर से शादी और डिलिवरी, ब्रेस्टफीडिंग में कमी के कारण कैंसर बढ़ रहा है।
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साल में एक बार मैमोग्राफी व सेल्फ एग्जामिनेशन जरूरी
डॉ. आर्या ने बताया कि हर महिला को साल में एक बार मैमोग्राफी टेस्ट जरूर कराना चाहिए। वहीं समय-समय पर सेल्फ एग्जामिनेशन भी करते रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि देश में हर साल ब्रेस्ट कैंसर के 1.70 लाख नए मरीज मिलते हैं। करीब 85000 की मौत भी हो जाती है।
कम उम्र में भी हो रहा ब्रेस्ट कैंसर
दिल्ली से आए दूसरे विशेषज्ञ आंकोलॉजी सर्जन डॉ. अमीष चौधरी ने बताया कि पहले यह मर्ज 50 से 55 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं में होता था, लेकिन अब यह उम्र घट कर 40-45 हो गई है। यहां तक 24-25 वर्ष की युवतियों में भी ब्रेस्ट कैंसर की शिकायत आने लगी है। उन्होंने कहा अगर फर्स्ट स्टेज पर पता चल जाए तो इसका संपूर्ण इलाज संभव है। वहीं बायोपसी को लेकर लोगों में भ्रम है कि इससे कैंसर बढ़ जाता है। लेकिन यह गलत है।
जेनेटिक टेस्टिंग जरूरी
डॉ. अमीष ने बताया कि लाइफस्टाइल में सुधार तो जरूरी है ही। इसके अलावा ऐसी महिलाएं जिनके किसी भी ब्लड रिलेशन में किसी को ब्रेस्ट या ओवेरियन कैंसर या मल्टीपल कैंसर की शिकायत रही हो, या किसी पुरुष को ब्रेस्ट कैंसर की शिकायत रही हो तो उनमें इसका रिस्क कई गुना बढ़ जाता है। ऐसी महिलाओं को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। कार्यक्रम में क्लब की अध्यक्ष वंदना अग्रवाल, कोषाध्यक्ष मधु भार्गव, आईएसओ सजिता गर्ग, एडिटर सुधा गुप्ता समेत बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं।