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Lucknow News: बहुमंजिला इमारतों में आधुनिक इंटीरियर बन जाता है मौत का जाल
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लखनऊ। राजधानी के अलीगंज में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत ने राजधानी में बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक इमारतों में इस्तेमाल होने वाली कई सजावटी और निर्माण सामग्रियां ऐसे हादसों को अधिक घातक बना रही हैं।
उत्तर प्रदेश काउंसिल फाॅर साइंस एंड टेक्नाोलाॅजी से जुड़े राजधानी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. सुमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बहुमंजिला भवनों में फॉल्स सीलिंग, पीवीसी पैनल, प्लास्टिक आधारित लैमिनेट, सिंथेटिक परदे, फोम वाले सोफे और अन्य सजावटी सामग्री आग लगने पर तेजी से जहरीला धुआं छोड़ती हैं।
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इससे कुछ ही मिनटों में पूरा भवन धुएं से भर जाता है और लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाता। आग की घटनाओं में अधिकांश मौतें जलने से नहीं, बल्कि दम घुटने और जहरीली गैसों के प्रभाव से होती हैं।
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अलीगंज हादसे के बाद विशेषज्ञों ने फायर-रेटेड निर्माण सामग्री, लो-स्मोक केबल, स्वचालित स्प्रिंकलर, स्मोक डिटेक्टर और धुआं निकालने की प्रभावी व्यवस्था को अनिवार्य बनाने की जरूरत बताई है। डाॅ सुमित ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के बीच भवनों की डिजाइन और निर्माण सामग्री के सुरक्षा मानकों की नए सिरे से समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोका जा सके।