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अगर आपका बच्चा ब्लू व्हेल गेम खेल रहा हो तो तुरंत दें पुलिस को जानकारी
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 11 Sep 2017 05:26 PM IST
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blue whale
- फोटो : blue whale
राजधानी के स्कूलों में ब्लू व्हेल सुसाइड चैलेंज के बढ़ते मामलों को लेकर पुलिस सतर्क और संवेदनशील हो गई है।
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एसएसपी ने अभिभावकों और स्कूल प्रशासन को इस खतरनाक गेम के शिकंजे में फंसे बच्चों की जान बचाने के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने और संदेहास्पद व्यवहार पाए जाने पर तत्काल पुलिस को सूचना देने की अपेक्षा जताई है।
एसएसपी दीपक कुमार ने कहा कि ब्लू व्हेल सुसाइड चैलेंज गेम स्कूली बच्चों को तेजी से अपने शिकंजे में ले रहा है। आठ से 18 वर्ष के बच्चे इसके टारगेट में हैं।
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प्रतिष्ठित स्कूलों में कक्षा तीन से हाईस्कूल व इंटर के छात्र तक इस गेम की चुनौतियां पूरी करने में खुद को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे मामले स्कूलों में लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे बच्चों के अभिभावकों को बुलवाकर जानकारी भी दी जा रही है।
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एसएसपी ने कहा कि बच्चों को इस गेम से बचाने के लिए अभिभावकों और स्कूल प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में पुलिस की ओर से दोनों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है।
अभिभावक और स्कूल प्रशासन जरा से सावधानी बरतकर बच्चों को खुद को नुकसान पहुंचाने से रोक सकते हैं। ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी देने के लिए स्कूल प्रशासन व अभिभावक पुलिस कंट्रोल रूम का नंबर 100 मिलाकर सूचना दें।
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इन बातों का रखें ध्यान
बच्चे घर अथवा स्कूल के कंप्यूटर या मोबाइल पर इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हों तो यह सुनिश्चित करें कि वह कहीं ऐसी ऑनलाइन साइट का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे जो हिंसक अथवा अनैतिक व्यापार को बढ़ावा दे रही हो।
बच्चों को इंटरनेट की सुविधा अकेले अथवा एकांत में न दें। उनका कंप्यूटर घर में ऐसी जगह पर लगाएं जहां हर वक्त परिवार के लोगों की नजर रहे।
बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। उनसे बातचीत करके केवल नैतिक और सुरक्षित ऑनलाइन उपयोग करने और साइबर वर्ल्ड की दिलचस्प व उपयोगी गतिविधियों में शामिल होने को प्रेरित करें।
खुद को हाल की साइबर जानकारियों से अपडेट रखें। अपने बच्चों के लिए आदर्श बनें और उनके सामने अपनी इंटरनेट की गतिविधियों के प्रति जागरूक रहें।
बच्चों के व्यवहार का बारीकी से आकलन करें। असामान्य बदलाव पर नजर रखें। बच्चा कम या ज्यादा बतचीत करे, पढ़ाई में रुचि कम हो, ग्रेड गिर रहा हो, ऐसे लक्षण मिलने पर स्कूल के अधिकारियों से बात करें व बाल मनोवैज्ञानिक से भी चर्चा करें।
बच्चे के ब्लू व्हेल सुसाइड चैलेंज गेम खेलने की जानकारी मिलते ही उसके इंटरनेट के उपयोग पर तत्काल रोक लगा दें। साथ ही स्थानीय पुलिस को सूचना दें ताकि उसकी सुरक्षा के उपाय किए जा सकें।
शिक्षकों, स्कूल में छात्रों की गतिविधियों, उनके ग्रेड गिरने व सामाजिक व्यवहार पर नजर रखें। अकेले व गुमसुम रहने वाले बच्चों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करें।
स्कूल में बच्चों के संदेहास्पद, खतरनाक अथवा हिंसक व्यवहार पर शिक्षक तत्काल स्कूल प्रशासन को जानकारी देने के साथ उनके अभिभावकों से संपर्क करें।
स्कूलों में बच्चे किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस अथवा गैजेट का उपयोग न करें, यह शिक्षक सुनिश्चित करें।
बच्चों को समय-समय पर इंटरनेट के दुष्प्रभाव के बारे में जानकारी देते हुए उन्हें संवेदनशील बनाएं।
बच्चों को इंटरनेट की सुविधा अकेले अथवा एकांत में न दें। उनका कंप्यूटर घर में ऐसी जगह पर लगाएं जहां हर वक्त परिवार के लोगों की नजर रहे।
बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। उनसे बातचीत करके केवल नैतिक और सुरक्षित ऑनलाइन उपयोग करने और साइबर वर्ल्ड की दिलचस्प व उपयोगी गतिविधियों में शामिल होने को प्रेरित करें।
खुद को हाल की साइबर जानकारियों से अपडेट रखें। अपने बच्चों के लिए आदर्श बनें और उनके सामने अपनी इंटरनेट की गतिविधियों के प्रति जागरूक रहें।
बच्चों के व्यवहार का बारीकी से आकलन करें। असामान्य बदलाव पर नजर रखें। बच्चा कम या ज्यादा बतचीत करे, पढ़ाई में रुचि कम हो, ग्रेड गिर रहा हो, ऐसे लक्षण मिलने पर स्कूल के अधिकारियों से बात करें व बाल मनोवैज्ञानिक से भी चर्चा करें।
बच्चे के ब्लू व्हेल सुसाइड चैलेंज गेम खेलने की जानकारी मिलते ही उसके इंटरनेट के उपयोग पर तत्काल रोक लगा दें। साथ ही स्थानीय पुलिस को सूचना दें ताकि उसकी सुरक्षा के उपाय किए जा सकें।
शिक्षकों, स्कूल में छात्रों की गतिविधियों, उनके ग्रेड गिरने व सामाजिक व्यवहार पर नजर रखें। अकेले व गुमसुम रहने वाले बच्चों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करें।
स्कूल में बच्चों के संदेहास्पद, खतरनाक अथवा हिंसक व्यवहार पर शिक्षक तत्काल स्कूल प्रशासन को जानकारी देने के साथ उनके अभिभावकों से संपर्क करें।
स्कूलों में बच्चे किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस अथवा गैजेट का उपयोग न करें, यह शिक्षक सुनिश्चित करें।
बच्चों को समय-समय पर इंटरनेट के दुष्प्रभाव के बारे में जानकारी देते हुए उन्हें संवेदनशील बनाएं।