स्वाइन फ्लू को लेकर गर्माई यूपी की राजनीति
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सूबे में लोगों में दहशत का कारण बना स्वाइन फ्लू की गूंज बृहस्पतिवार को यहां विधानमंडल के दोनों सदनों में भी सुनाई दी। परिषद में कॉंग्रेस व रालोद सदस्यों ने मास्क पहनकर स्वाइन फ्लू से निपटने में सरकार की लापरवाही के खिलाफ विरोध व नारेबाजी की।
बसपा सदस्य भी वेल में आ गए और स्वाइन फ्लू तथा कानून-व्यवस्था दोनों से निपटने में सरकार को पूरी तरह असफल बताते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की । सदस्यों की नारेबाजी और बार-बार वेल में आने के कारण विधानपरिषद की कार्यवाही नहीं चल पाई।
सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित करने के बाद भी जब सदस्य नारेबाजी करते रहे तो सभापति गणेशशंकर पाण्डेय ने शोरशराबे के बीच ही कार्यसूची का कामधाम निपटाकर सदन को मंगलवार पूर्वाह्न ११ बजे तक स्थगित कर दिया। विधानसभा में कॉंग्रेस के नेता प्रदीपमाथुर और रालोद के नेता दलबीर सिंह ने स्वाइन फ्लू के कहर और इसे रोकने में सरकार की असफलता का मामला उठाया।
सरकार ने की है पूरी व्यवस्था
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष और नेता सदन अहमद हसन के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। नेता सदन ने दावा किया कि स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए सरकार से सभी संभव व्यवस्थाएं की हैं। इसी के चलते उत्तर प्रदेश में दूसरे राज्यों की तुलना में सबसे कम मौतें हुई हैं।
नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने इसे तथ्यहीन बताया। भाजपा के नेता हृदयनारायण दीक्षित ने सदन में शोरशराबे और हंगामे पर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सभापति से आग्रह किया कि सदन को चलाया जाए। जिससे स्वाइन फ्लू पर सरकार की स्थिति की जानकारी मिले और विपक्ष इस खतरनाक बीमारी से निपटने के लिए सरकार को कुछ तथ्य व सुझाव मुहैया करा सके।
साथ आए कांग्रेसी और बसपाई
परिषद में सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कॉंग्रेस व रालोद के सदस्य मास्क पहनकर सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए सभापति के आसन के सामने आ गए और नारेबाजी करने लगे। बसपा के सदस्य भी स्वाइन फ्लू और कानून-व्यवस्था पर सरकार की असफलता के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। हंगामे के कारण सभापति ने कार्यवाही आधा घंटा के लिए स्थगित कर दी।
फिर अपने कक्ष से स्थगन का समय १२ बजे तक बढ़ा दिया। बारह बजे जब सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो रालोद, कॉंग्रेस और बसपा के सदस्य वेल में आकर सारे नियमों को स्थगित करके स्वाइन फ्लू पर विपक्ष को सुनने की मांग करने लगे। हंगामे के चलते सभापति ने कार्यवाही ५ मिनट के लिए स्थगित कर दी।
तीसरी बार जब सभापति ने फिर आसन संभाला तो कॉंग्रेस, रालोद और बसपा के सदस्य अपने स्थानों पर खड़े होकर नारेबाजी करने लगे। सभापति ने शोरशराबे के बीच एजेंडे का काम निपटाकर सदन की कार्यवाही मंगलवार तक स्थगित कर दी।