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यूपी: गुमशुदा बच्ची का केस हो गया था बंद, 10 साल बाद फिर से खोला गया, नए सिरे से होगी जांच

Sun, 06 Dec 2020 11:25 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 06 Dec 2020 11:25 AM IST
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Missing girl case reopened after 10 years in lucknow
फाइल फोटो
लखनऊ के बंगला बाजार से दस साल पहले लापता हुई बच्ची की गुमशुदगी की बंद फाइल शनिवार को पुलिस ने फिर से खोल दी। बच्ची की गुमशुदगी का केस मोहनलालगंज कोतवाली में दर्ज था। कई महीने तक उसका सुराग न मिलने पर पुलिस ने मामले में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। 
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हालांकि, बीते बुधवार को बच्ची से युवती बन चुकी पीड़िता के चिनहट से बरामद होने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया। इंस्पेक्टर जीडी शुक्ला ने बताया कि पीड़िता का केस फिर से खोलकर नए सिरे से विवेचना की जाएगी। फिलहाल पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। सोमवार को उसके मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान कराए जाएंगे।
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इंस्पेक्टर ने बताया कि 18 दिसंबर 2010 की सुबह घर के बाहर खेलते हुए गायब हुई बच्ची की उम्र 11 साल थी। बुधवार को वन स्टॉप सेंटर की मैनेजर अर्चना सिंह और बाल कल्याण समिति के सदस्यों की सहायता से बच्ची को चिनहट में ट्रैवल एजेंसी संचालक धर्मेंद्र सिंह के घर से काफी बदहाल स्थिति में बरामद किया था। 
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बच्ची ने प्रताड़ना और शोषण की जो आपबीती सुनाई, उसने सबके रोंगटे खड़े कर दिए थे। सदमे से सहमी युवती की परिवारीजनों और वन स्टॉप सेंटर के अधिकारियों ने दो दिन तक काउंसिलिंग करके शनिवार को पुलिस से संपर्क किया। 

उसे लेकर अर्चना सिंह व परिवारीजन मोहनलालगंज थाना पहुंचे और इंस्पेक्टर को पूरा घटनाक्रम बताया। अर्चना सिंह ने अपनी संस्था की केस व काउंसिलिंग की रिपोर्ट और सीडब्ल्यूसी के सामने दिए गए युवती के बयान पुलिस के समक्ष रखे।

इंस्पेक्टर ने बताया कि पीड़िता की गुमशुदगी का केस कई साल पहले ही पुलिस ने बंद कर दिया था। उसके बरामद होने के बाद केस फिर से खोलकर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि केस की जांच नए सिरे से की जाएगी। बच्ची के साथ जो भी हुआ, उसकी हालत के लिए जो लोग दोषी हैं, वह भले ही पुलिसकर्मी हों, उन पर कानून का शिकंजा कसा जाएगा। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

प्रसव की जानकारी के लिए अस्पताल जाएगी पुलिस
वन स्टॉप सेंटर की मैनेजर अर्चना सिंह के मुताबिक, पीड़िता ने एक अस्पताल में संतान पैदा करने की जानकारी दी थी। उन्होंने मोहनलालगंज इंस्पेक्टर से इस बारे में चर्चा की। इंस्पेक्टर ने बताया कि पीड़िता जिस अस्पताल का नाम ले रही है, वहां जाकर प्रसव के बारे में जानकारी की जाएगी।

बाल श्रम, बाल विवाह, मानव तस्करी से लेकर सरोगेसी तक के आरोप
वन स्टॉप सेंटर की मैनेजर अर्चना सिंह ने पीड़िता के साथ बाल श्रम, बाल विवाह, मानव तस्करी और सरोगेसी तक का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पीड़िता जब गायब हुई थी तो उसे बंधक बनाकर काम कराया गया। नाबालिग होते हुए भी उसकी शादी करा दी गई। यह मामला मानव तस्करी से भी जुड़ा है। जो व्यक्ति बच्ची को ले गया था, उसके कोई संतान नहीं थी। यह भी आशंका है कि उसे किराये की कोख के रूप में भी इस्तेमाल किया गया हो। उन्होंने पुलिस से इन सभी पहलुओं पर जांच करने की आवश्यकता जताई है।
 
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