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इंडो-नेपाल बॉर्डर रोड परियोजना के नए सीमांकन को गृह मंत्रालय की हरी झंडी
Mon, 05 Oct 2020 10:31 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 05 Oct 2020 10:31 PM IST
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indo-nepal border
- फोटो : अमर उजाला।
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इंडो नेपाल बॉर्डर रोड परियोजना के नए सीमांकन को केंद्रीय गृह मंत्रालय से हरी झंडी मिल गई है। अब पीडब्ल्यूडी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगा। वन विभाग की एनओसी के लिए पेड़ों के सर्वे का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। चीन के साथ नेपाल की बढ़ रही नजदीकियों को देखते हुए इंडो-नेपाल बॉर्डर रोड परियोजना को शीघ्र पूरा करने का निर्णय लिया गया है।
इस परियोजना के प्रथम चरण में 240 किमी निर्माण को वर्ष 2010 में ही वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति दे दी गई थी। वन विभाग की क्लीयरेंस न मिलने से दूसरे फेज का काम अटक गया था। ज्यादा पेड़ों के कटान की आशंका से वन विभाग ने आपत्ति लगा दी थी। इसलिए प्रदेश सरकार ने इस तरह सीमांकन करने का निर्देश दिया, जिससे सड़क भी बन जाए और पेड़ों का कटान भी न्यूनतम हो और सीमा सुरक्षा बल की चौकियां भी एक-दूसरे से जुड़ जाएं।
नए सीमांकन का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा गया था, जिसे मंजूर कर लिया गया है। इस सड़क की कुल लंबाई 570 किलोमीटर है। निर्माण पर करीब 3000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। सड़क का 299 किमी. हिस्सा वन क्षेत्र से गुजरेगा। नेपाल सीमा प्रदेश में पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महराजगंज जिलों से सटी है। पीलीभीत में इस सड़क की कुल लंबाई 37 किमी., लखीमपुर खीरी में 125, बहराइच में 108, श्रावस्ती में 71, बलरामपुर में 84, सिद्धार्थनगर में 75 और महराजगंज में 70 किलोमीटर होगी।
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इस परियोजना के प्रथम चरण में 240 किमी निर्माण को वर्ष 2010 में ही वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति दे दी गई थी। वन विभाग की क्लीयरेंस न मिलने से दूसरे फेज का काम अटक गया था। ज्यादा पेड़ों के कटान की आशंका से वन विभाग ने आपत्ति लगा दी थी। इसलिए प्रदेश सरकार ने इस तरह सीमांकन करने का निर्देश दिया, जिससे सड़क भी बन जाए और पेड़ों का कटान भी न्यूनतम हो और सीमा सुरक्षा बल की चौकियां भी एक-दूसरे से जुड़ जाएं।
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नए सीमांकन का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा गया था, जिसे मंजूर कर लिया गया है। इस सड़क की कुल लंबाई 570 किलोमीटर है। निर्माण पर करीब 3000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। सड़क का 299 किमी. हिस्सा वन क्षेत्र से गुजरेगा। नेपाल सीमा प्रदेश में पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महराजगंज जिलों से सटी है। पीलीभीत में इस सड़क की कुल लंबाई 37 किमी., लखीमपुर खीरी में 125, बहराइच में 108, श्रावस्ती में 71, बलरामपुर में 84, सिद्धार्थनगर में 75 और महराजगंज में 70 किलोमीटर होगी।
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