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योगी कैबिनेट में दल बदलू नेताओं को मिली 'मलाई'
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 20 Mar 2017 01:16 PM IST
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स्वामी प्रसाद मौर्या
- फोटो : amar ujala
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लगभग डेढ़ दशक बाद सूबे में बनी भाजपा की सरकार में दूसरे दलों से आए नेताओं को खासी तवज्जो मिली है। ऐसे नौ नेताओं को मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ ने अपनी कैबिनेट में शामिल किया है।
इनमें सात को कैबिनेट मंत्री व दो को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। इनमें बसपा छोड़कर आए स्वामी प्रसाद मौर्य व बृजेश पाठक तथा कांग्रेस छोड़कर आने वाली डॉ. रीता बहुगुणा जोशी व नंद गोपाल नंदी प्रमुख हैं। इन चारों को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।
ये सभी नेता विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी हवा का रुख भांपकर भाजपा में आ गए थे। सत्ता में लौटने को बेताब भाजपा ने न सिर्फ इन सभी को हाथों-हाथ लिया बल्कि चुनाव में इन पर दांव भी लगाया। भाजपा के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे इन दलबदलुओं को भाजपा ने तोहफे के रूप में मंत्री पद से नवाजा है।
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स्वामी प्रसाद मौर्य
स्वामी प्रसाद मौर्य 16वीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे। वे बसपा प्रमुख मायावती के करीबी व भरोसेमंद नेता माने जाते थे, लेकिन विधानसभा चुनाव सेपहले उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। कुशीनगर की पडरौना सीट से चुनाव जीतकर आए स्वामी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। मौर्य पिछले साल अगस्त में भाजपा में शामिल हुए थे।
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इनमें सात को कैबिनेट मंत्री व दो को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। इनमें बसपा छोड़कर आए स्वामी प्रसाद मौर्य व बृजेश पाठक तथा कांग्रेस छोड़कर आने वाली डॉ. रीता बहुगुणा जोशी व नंद गोपाल नंदी प्रमुख हैं। इन चारों को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।
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ये सभी नेता विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी हवा का रुख भांपकर भाजपा में आ गए थे। सत्ता में लौटने को बेताब भाजपा ने न सिर्फ इन सभी को हाथों-हाथ लिया बल्कि चुनाव में इन पर दांव भी लगाया। भाजपा के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे इन दलबदलुओं को भाजपा ने तोहफे के रूप में मंत्री पद से नवाजा है।
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स्वामी प्रसाद मौर्य
स्वामी प्रसाद मौर्य 16वीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे। वे बसपा प्रमुख मायावती के करीबी व भरोसेमंद नेता माने जाते थे, लेकिन विधानसभा चुनाव सेपहले उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। कुशीनगर की पडरौना सीट से चुनाव जीतकर आए स्वामी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। मौर्य पिछले साल अगस्त में भाजपा में शामिल हुए थे।
डॉ. जोशी ने पिछले साल अक्तूबर में ली थी सदस्यता
रीता बहुगुणा जोशी
- फोटो : demo pic
डॉ. रीता बहुगुणा जोशी
लंबे समय से कांग्रेस में रहीं डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने भी चुनाव से ठीक पहले पंजे को बाय-बाय कहते हुए कमल थाम लिया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुकीं रीता पिछली बार लखनऊ कैंट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीती थीं। भाजपा ने डॉ. जोशी को लखनऊ कैंट से टिकट दिया। वे मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को हराकर दोबारा विधानसभा पहुंची हैं। डॉ. जोशी ने पिछले साल अक्तूबर में भाजपा की सदस्यता ली थी।
दारा सिंह चौहान
पूर्व सांसद दारा सिंह चौहान की गिनती कभी बसपा सुप्रीमो मायावती के भरोसेमंद नेताओं में होती थी। मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया तो फरवरी 2015 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। मऊ जिले की मधुबन सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे दारा सिंह को भाजपा ने कैबिनेट मंत्री बनाया है। वे मायावती सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।
एसपी सिंह बघेल
एसपी सिंह बघेल सपा और बसपा से होते हुए भाजपा में पहुंचे हैं। वे 1998, 1999 व 2004 में लोकसभा सदस्य चुने गए थे। वह राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं। विधानसभा चुनाव से पहले वह बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए। भाजपा ने उन्हें टूंडला से मैदान में उतारा था। चुनाव जीतने का इनाम उन्हें मंत्रिपद के रूप में मिला है।
चौ. लक्ष्मी नारायण
चौ. लक्ष्मी नारायण मायावती की पिछली सरकार में मंत्री थे। जुलाई 2015 में उन्होंने बसपा छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा ने उन्हें मथुरा की छाता सीट से टिकट दिया और वह जीत गए। उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।
लंबे समय से कांग्रेस में रहीं डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने भी चुनाव से ठीक पहले पंजे को बाय-बाय कहते हुए कमल थाम लिया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुकीं रीता पिछली बार लखनऊ कैंट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीती थीं। भाजपा ने डॉ. जोशी को लखनऊ कैंट से टिकट दिया। वे मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को हराकर दोबारा विधानसभा पहुंची हैं। डॉ. जोशी ने पिछले साल अक्तूबर में भाजपा की सदस्यता ली थी।
दारा सिंह चौहान
पूर्व सांसद दारा सिंह चौहान की गिनती कभी बसपा सुप्रीमो मायावती के भरोसेमंद नेताओं में होती थी। मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया तो फरवरी 2015 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। मऊ जिले की मधुबन सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे दारा सिंह को भाजपा ने कैबिनेट मंत्री बनाया है। वे मायावती सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।
एसपी सिंह बघेल
एसपी सिंह बघेल सपा और बसपा से होते हुए भाजपा में पहुंचे हैं। वे 1998, 1999 व 2004 में लोकसभा सदस्य चुने गए थे। वह राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं। विधानसभा चुनाव से पहले वह बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए। भाजपा ने उन्हें टूंडला से मैदान में उतारा था। चुनाव जीतने का इनाम उन्हें मंत्रिपद के रूप में मिला है।
चौ. लक्ष्मी नारायण
चौ. लक्ष्मी नारायण मायावती की पिछली सरकार में मंत्री थे। जुलाई 2015 में उन्होंने बसपा छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा ने उन्हें मथुरा की छाता सीट से टिकट दिया और वह जीत गए। उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।
बसपा की नैया डगमगाती देख पहुंचे भगवा खेमे में
बृजेश पाठक
- फोटो : amar ujala
बृजेश पाठक
बृजेश पाठक की गिनती बसपा के प्रमुख ब्राह्मण नेताओं में होती थी। वह उन्नाव से सांसद भी रह चुके हैं। चुनाव से पहले बसपा की नैया डगमगाती देख वह भी अगस्त 2016 में भगवा खेमे की शरण में जा पहुंचे। वह लखनऊ मध्य से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। तोहफे में उन्हें कैबिनेट मंत्री का पद मिला है।
नंद गोपाल नंदी
नंद गोपाल नंदी मायावती सरकार में मंत्री रह चुके हैं। बसपा से निष्कासित किए जाने के बाद नंदी कांग्रेस में चले गए थे। सूबे में विधानसभा चुुनाव के एलान के बाद वह भाजपा में शामिल हुए। स्थानीय कार्यकर्ताओं के भारी विरोध के बावजूद भाजपा ने उन्हें इलाहाबाद दक्षिण से चुनाव मैदान में उतारा और वह जीत गए। अब उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।
धर्म सिंह सैनी
धर्म सिंह सैनी 16वीं विधानसभा में बसपा के विधायक थे। इस बार मायावती ने उनका टिकट काट दिया तो स्थानीय समीकरणों को भांपते हुए भाजपा ने उन्हें लपक लिया। सैनी मायावती सरकार में मंत्री रह चुके हैं। इस बार वह सहारनपुर की नकुड़ सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते हैं। उन्हें राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है।
अनिल राजभर
अनिल राजभर सपा छोड़कर भाजपा में आए हैं। उनके पिता रामजीत राजभर सपा से विधायक रह चुके हैं। पिछली सपा सरकार ने उन्हें दर्जाधारी राज्यमंत्री भी बनाया था। सियासी हवा का रुख भांपते हुए अनिल ने भाजपा का दामन थाम लिया। अनिल भाजपा के टिकट पर वाराणसी की शिवपुर सीट से विधायक चुने गए हैं। उन्हें राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है।
बृजेश पाठक की गिनती बसपा के प्रमुख ब्राह्मण नेताओं में होती थी। वह उन्नाव से सांसद भी रह चुके हैं। चुनाव से पहले बसपा की नैया डगमगाती देख वह भी अगस्त 2016 में भगवा खेमे की शरण में जा पहुंचे। वह लखनऊ मध्य से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। तोहफे में उन्हें कैबिनेट मंत्री का पद मिला है।
नंद गोपाल नंदी
नंद गोपाल नंदी मायावती सरकार में मंत्री रह चुके हैं। बसपा से निष्कासित किए जाने के बाद नंदी कांग्रेस में चले गए थे। सूबे में विधानसभा चुुनाव के एलान के बाद वह भाजपा में शामिल हुए। स्थानीय कार्यकर्ताओं के भारी विरोध के बावजूद भाजपा ने उन्हें इलाहाबाद दक्षिण से चुनाव मैदान में उतारा और वह जीत गए। अब उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।
धर्म सिंह सैनी
धर्म सिंह सैनी 16वीं विधानसभा में बसपा के विधायक थे। इस बार मायावती ने उनका टिकट काट दिया तो स्थानीय समीकरणों को भांपते हुए भाजपा ने उन्हें लपक लिया। सैनी मायावती सरकार में मंत्री रह चुके हैं। इस बार वह सहारनपुर की नकुड़ सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते हैं। उन्हें राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है।
अनिल राजभर
अनिल राजभर सपा छोड़कर भाजपा में आए हैं। उनके पिता रामजीत राजभर सपा से विधायक रह चुके हैं। पिछली सपा सरकार ने उन्हें दर्जाधारी राज्यमंत्री भी बनाया था। सियासी हवा का रुख भांपते हुए अनिल ने भाजपा का दामन थाम लिया। अनिल भाजपा के टिकट पर वाराणसी की शिवपुर सीट से विधायक चुने गए हैं। उन्हें राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है।