यूपी के मंत्री अफसरों से बोले- आप तो बच जाओगे, मेरा कॅरिअर दांव पर लग जाएगा
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उत्तर प्रदेश खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड दफ्तर की छह मंजिला नई बिल्डिंग बनाने में पुरानी ईंटों के इस्तेमाल पर विभागीय मंत्री सत्यदेव पचौरी ने नाराजगी जताई। उन्होंने बोर्ड के सीईओ से कहा-आप अधिकारी हैं, सस्पेंड होकर बहाल हो जाओगे।
अगर मैंने गलत काम को ओके किया तो मेरा तो राजनीतिक कॅरिअर ही दांव पर लग जाएगा। इसलिए बिना जांचे परखे एक भी कागज आगे नहीं बढ़ाऊंगा। उन्होंने राजकीय निर्माण निगम के कामकाज से नाखुशी जताते हुए स्ट्रक्चर में बदलाव के सुझाव भी दिए।
डालीबाग में 2013 में खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड की छह मंजिला नई बिल्डिंग के निर्माण के लिए 26.5 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। इसमें से कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को 16 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।
मंगलवार सुबह खादी ग्रामोद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी ग्राउंड फ्लोर का मुआयना करने पहुंच गए। उन्होंने वहीं से फर्स्ट फ्लोर पर लगी ईंटों को देखकर अफसरों से कहा-ये तो आपने पुरानी ईंटें लगा दी हैं। अगर प्लास्टर करा देते तो यह कमी नहीं देख पाता।
काम के लिए उपयुक्त नहीं कार्यदायी संस्था
उन्होंने एंट्री पॉइंट की डिजाइन पर भी सख्त एतराज जताया। आर्किटेक्ट ने कहा, अब इसे सुधारना मुश्किल होगा तो मंत्री ने नाराजगी जताई। इस पर बोर्ड के सीईओ अखिलेश सिंह ने कहा, संशोधित एस्टीमेट बोर्ड से पास करवा लिया जाएगा।
पचौरी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रथमदृष्टया लग रहा है कि कार्यदायी संस्था ठीक से काम नहीं कर रही है। रैंप को देखकर लगा कि वह इस काम को करने के लिए उपयुक्त नहीं है, लेकिन निर्माण की इस अवस्था में कार्यदायी संस्था को बदलना संभव नहीं है।
लगता है, काम की मॉनिटरिंग नहीं होने से निर्माण निगम के लोग मनमानी करने लगे। कोई भी अफसर मुझे गुमराह नहीं कर सकता। काम की गुणवत्ता देखकर ही कार्यदायी संस्था को पेमेंट होगा। कहा कि एक-एक फाइल देखने के बाद ही बोर्ड के कामकाज पर विस्तार से चर्चा कर पाऊंगा। अगर खामियां मिलीं तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
बिना टेंडर कैसे दे दिया काम
कैबिनेट मंत्री ने निर्माण कार्य संबंधी फाइल देखने के बाद बोर्ड के अफसरों से पूछा कि बिना टेंडर कराए राजकीय निर्माण निगम को काम कैसे दे दिया गया? इस पर वित्तीय सलाहकार रागिनी सिंह ने कहा, राज्य सरकार के एक शासनादेश के तहत निगम को बिना टेंडर काम दिया जा सकता है।
इस पर पचौरी ने वह आदेश मांगा, पर वित्तीय सलाहकार उसे नहीं दिखा सकीं। पचौरी ने उन्हें आदेश बाद में दिखाने को कहा। साथ ही कहा कि अगर नियमानुसार निगम को काम दिया गया है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं, पर बिना शासनादेश के ऐसा हुआ होगा तो कार्रवाई के लिए भी तैयार रहें।