{"_id":"c6e68954b02391c3d86636666f9aecbd","slug":"mid-day-meal-enquiry","type":"story","status":"publish","title_hn":"खींचातानी में फंसा मिड-डे-मील जांच अभियान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खींचातानी में फंसा मिड-डे-मील जांच अभियान
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 23 Jul 2013 08:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिहार में मिड-डे-मील हादसे के बाद चेते प्रशासन का जांच पड़ताल कराने का ऐलान फिलहाल प्रशासनिक खींचातानी में फंसा नजर आ रहा है।
विज्ञापन
एक सप्ताह बाद भी एफएसडीए की जिला टीम मिड-डे-मील बनाने में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री के नमूनों की जांच पड़ताल शुरू नहीं कर पायी है।
जिम्मेदार अधिकारी जिला प्रशासन की तरफ से कार्रवाई शुरू किए जाने के लिए कोई लिखित आदेश जारी न होने को कारण बता रहे हैं।
उनका कहना है कि मिड-डे-मील नॉट फॉर सेल की श्रेणी में आता है। इसके नमूनों की सैंपलिंग के लिए विशेष आदेश पर ही कार्रवाई संभव हो सकती है।
बीते दिनों एफएसडीए जिला इकाई के प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट ने स्कूलों में बच्चों को बांटे जाने वाले मिड-डे-मील में प्रयुक्त होने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांचने को सैंपलिंग अभियान शुरू कराने की बात कही थी।
विज्ञापन
उन्होंने इस संबंध में तीन दिन के अंदर एफएसडीए प्रशासन को दिशा निर्देश जारी कर जांच अभियान शुरू कराने का भरोसा भी दिलाया था। फिल्हाल एक सप्ताह से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच पड़ताल कराने का दावा हवाई बना है।
विज्ञापन
न तो सिटी मजिस्ट्रेट की तरफ से अभी तक एफएसडीए अधिकारियों को इस बाबत कोई लिखित आदेश जारी किया गया और न ही मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने अपने स्तर पर ही जांच पड़ताल शुरू कराने की कोई जरूरत समझी।
सीएसएफआई जेपी सिंह का कहना है कि जिला प्रशासन की तरफ से दिशा निर्देश मिलते ही खाद्य सामग्री की सैंपलिंग करा प्रयोगशाला में जांच को भेजने की कार्यवाही शुरू होगी।
एफएसडीए अधिकारियों का तर्क है कि वह अपने स्तर पर इसकी जांच के लिए सैंपलिंग कार्य शुरू नहीं कर सकते क्योंकि एक्ट के तहत मिड-डे-मील को तैयार कर वितरित कराने का कार्य विक्रय की श्रेणी में नहीं आता।
इसमें प्रयुक्त खाद्य सामग्री की जांच पड़ताल के लिए जिला प्रशासन अथवा शासन स्तर से स्पष्ट तौर पर लिखित दिशा निर्देश के बाद ही जांच अभियान शुरू कराया जा सकता है।