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मेट्रो टेंडर के बढ़े बजट का जनता को नहीं मिलेगा जवाब
ऋषि मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 07 Nov 2014 02:40 PM IST
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एलएमआरसी के प्राइमरी सेक्शन के लिए हुए पहले टेंडर को लेकर विवाद बढ़ गया है। एमडी कुमार केशव का कहना है कि, 90 करोड़ रुपये की लागत आखिर किस तरह से बढ़ गई।
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इस बात को सार्वजनिक तौर पर डिस्कस नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि सबसे कम मांग एलएंडटी की थी, इसलिए कंपनी को ये टेंडर दिया गया है।
मजे की बात यह है कि, मेट्रो रेल परियोजना में लग रहा एक-एक रुपया सरकार अलग-अलग मदों में जनता की ही जेब से निकाल रही है। ऐसे में जनता को जवाब न मिल पाना एक बड़ा सवाल है।
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मेट्रो रेल परियोजना के सिविल कार्यों के लिए किया गया पहला टेंडर विवादों में घिर गया है। टेंडर के 541 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत था।
एलएमआरसी बोर्ड ने इसे 90 करोड़ रुपये बढ़ा लिया और एलएंडटी के पक्ष में ये टेंडर 631 करोड़ रुपये का स्वीकृत किया गया है।
टेंडर स्वीकृत हुए लगभग सवा महीना बीत चुका है और अब तक इस बात की औपचारिक घोषणा एलएमआरसी की ओर से नहीं की गई।
इस संबंध में एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव का कहना है कि, टेंडर प्रक्रिया ऐसा विषय नहीं है, जिसकी सार्वजनिक तौर पर चर्चा की जाए।