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डीएमआरसी फरवरी-2017 में चला देगा आलमबाग तक मेट्रो

Sat, 09 Nov 2013 02:20 AM IST
ऋषि मिश्र/लखनऊ
ऋषि मिश्र/लखनऊ Updated Sat, 09 Nov 2013 02:20 AM IST
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metro run between amausi to alambag in 2017

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से प्रदेश सरकार को आशान्वित किया गया है कि, अगर डीएमआरसी को लखनऊ मेट्रो परियोजना काम मिलेगा तो फरवरी-2017 तक अमौसी से आलमबाग के बीच का काम खत्म कर देंगे।

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अमौसी से मुंशीपुलिया के बीच पूरे नार्थ साउथ कॉरिडोर का ट्रायल रन शुरू करने में फरवरी-2019 तक का समय लगेगा।

मगर यह काम करने के लिए डीएमआरसी उसी स्थिति में राजी होगा,जब उसको अपने बोर्ड से अनुमति मिल जाएगी।

डीएमआरसी बोर्ड की मीटिंग आठ फरवरी को दिल्ली में विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित हो जाने के बाद होगी।

ऐसे में कम से कम डेढ़ महीने का समय कॉरपोरेशन को अपना फैसला करने में लगेगा। इस काम को करने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से प्रबंध निदेशक मंगू सिंह ने अपना प्रस्तुतिकरण मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समक्ष शुक्रवार को किया गया।
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जिसमें इस बात पर सहमति बनी कि मेट्रो रेल परियोजना के पहले फेज का निर्माण कार्य टर्न-की (पूरा काम एक एजेंसी को ठेके पर।) के आधार पर करवाया जाएगा।

जयपुर में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने इसी तरह काम किया और लगभग तीन साल में नौ किलोमीटर के पहले खंड पर ट्रायल रन का आगाज भी कर दिया।


जबकि, कोच्चि में भी डीएमआसी ने इसी आधार पर काम का आगाज कर दिया है। यही फार्मूला लखनऊ में भी आजमाया जाएगा।

मंगू सिंह ने बताया कि, इस तरह से काम करने में डीएमआरसी परियोजना की कुल लागत का 6 फीसदी धन बतौर सेंटेज (पारिश्रमिक) लेता है।

इसके बाद में सारा काम कॉरपोरेशन के जिम्मे होगा। जिसमें टेंडर से लेकर निर्माण और गुणवत्ता की जांच जैसे तमाम मुद्दे शामिल होंगे। राज्य सरकार के हवाले परियोजना को ट्रायल रन के बाद दे दिया जाएगा।
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प्रजेंटेशन में बताईं गिनाईं उपलब्धियां
यह बैठक लगभग ढाई घंटे चली। जिसमें सबसे पहले एमडी डीएमआरसी ने देश के विभिन्न हिस्सों में कॉरपोरेशन जो काम कर रहा है,उसका परिचय दिया।

लखनऊ में डीपीआर के तमाम बिंदुओं से एक बार फिर से मुख्यमंत्री को परिचित करवाया।

जिसमें यहां के प्रति घंटा रूट से गुजरने वाले वाहनों की संख्या,मेट्रो की विभिन्न सालों में रोज यात्रा करने वाले यात्रियों का अनुमान,इस परियोजना पर आने वाले खर्च और अन्य अहम बिंदुओं के बारे में बताया गया।

टर्न की के आधार पर बताई डेडलाइन
एमडी के प्रस्तुतिकरण में दावा किया गया कि, अगर टर्न-की बेसिस पर अगर डीएमआरसी से काम शुरू करवाया गया तो,वे 25 जनवरी-2014 से वे अपना काम शुरू कर देंगे।

फरवरी-2017 तक अमौसी से आलमबाग के बीच ट्रायल रन शुरू करा देंगे। जबकि आलमबाग से मुंशीपुलिया तक का ट्रायल रन फरवरी-2019 तक शुरू होगा।

मगर काम करने का फैसला डीएमआरसी आठ दिसंबर के बाद होने वाली बोर्ड मीटिंग में लेगा। आठ दिसंबर तक दिल्ली में आचार संहिता लागू रहेगी। इसलिए कोई फैसला नहीं होगा।

लागत का छह फीसदी मेहनताना लेगा डीएमआरसी
डीएमआरसी ने टर्न की बेसिस पर काम करने के लिए कुल लागत का छह प्रतिशत बतौर सेंटेज (पारिश्रमिक) मांगा है।

अगर एलएमआरसी अपने संसाधनों के जरिये यह काम कराता तो करीब 3.25 फीसदी का खर्च आता है। मगर जिस तरह से सारा काम डीएमआरसी के हवाले किया जा सकेगा, उससे यह 3 फीसदी का खर्च कोई बहुत ज्यादा नहीं है।

रेल विकास निगम भी लाइन में
टर्न-की आधार पर रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) भी लाइन में है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री के समक्ष आरवीएनएल के एमडी ने भी प्रस्तुतिकरण किया था।

फिलहाल उस प्रस्तुतिकरण के अतिरिक्त कोई भी औपचारिक प्रस्ताव आरवीएनल की ओर से नहीं दिया गया है।

निगम फिलहाल कोलकाता मेट्रो का विस्तार कर रहा है। टर्न की बेसिस पर उनका सेंटेज कुल लागत का 9.25 फीसदी है। यह डीएमआरसी से 3.25 फीसदी अधिक है।

टेंडर का हक देने के लिए एचपीसी 12 को
डीएमआरसी को निर्माण के टेंडर करने का हक देने के लिए मेट्रो की हाईपावर कमेटी की मीटिंग 12 नवंबर को की जाएगी।

इससे पहले डिजाइन कंसलटेंट का चयन करने के लिए डीएमआरसी पहले ही निविदा कर चुका है। इसके बाद अब सिविल कार्य का लगभग 350-400 करोड़ रुपए का टेंडर करने के लिए डीएमआरसी को अधिकृत किया जाएगा।

मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता वाली हाईपावर कमेटी इस बात पर मुहर लगाएगी। ताकि, जिस बीच में टर्न-की के आधार पर काम करने वाली संस्था तय हो, उस बीच में टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाए।


19 फीसदी धन की बचत का अनुमान
लखनऊ की जनता को मेट्रो के जरिये करीब 19 फीसदी धन की बचत होगी। उनका समय,ईंर्धन,धन आदि की बचत आम वाहनों के मुकाबले 19 फीसदी के औसत पर बचेगी।

यह कहीं ज्यादा तो कहीं कम होगी। इसको इकनॉमिकल रेट ऑफ रिटर्न कहा जाता है। इसके अलावा फाइनेंशियल इंटर्नल रेट ऑफ रिटर्न आठ फीसदी होगा।

ये दोनों ही आंकड़े अन्य शहरों के मुकाबले कहीं अधिक हैं। जिसको मंगू सिंह ने खासा बढ़िया बिंदु बताया।

हम तेजी से पूरी कराएंगे टेंडर की प्रक्रिया: मंगू सिंह
डीएमआरसी के एमडी मंगू सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि, वे टेंडर प्रक्रिया को तेजी से निपटाने में लगे हुए हैं।

हमने राज्य सरकार की इच्छा अनुरूप अब तक जितनी भी जिम्मेदारियां दी गई हैं, उनको तत्परता के साथ निभाया है। इसमें डीपीआर बनाना,इसके बाद उसमें कुछ संशोधन करना।

रिंग लाइन,मिल रोड लाइन और अन्य रूटों के लिए टेकभनोफिजीबिलिटी रिपोर्ट बनाना सभी काम बहुत तेजी से किए जा रहे हैं।

इसलिए अब जो सिविल निर्माण का टेंडर किया जाना है, उसको भी शीघ्र कराएंगे। डिजाइन कंसलटेंट का काम 15 नवंबर तक खत्म हो जाएगा।

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