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मेट्रो के लिए विदेशी बैंकों से भी लेंगे कर्ज
लखनऊ/ऋषि मिश्र
Updated Fri, 27 Sep 2013 01:57 AM IST
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मेट्रो रेल के लिए जापानी कंपनी जाइका के अतिरिक्त अन्य विदेशी बैंकिंग संस्थाओं से भी ऋण लेने की तैयारी की जा रही है।
इस संबंध में मेट्रो सेल के चेयरमैन राजीव अग्रवाल ने कोशिशें शुरू कर दी है। उन्होंने गत दिनों दिल्ली में वित्त मंत्रालय से इस संबंध में वार्ता भी शुरू कर दी है।
मेट्रो परियोजना में बजट का एक बड़ा हिस्सा ऋण के तौर पर भी जुटाया जाएगा। इसके लिए फिलहाल जापानी कंपनी जाइका का नाम सबसे आगे था।
मेट्रो परियोजना के प्रस्तावित पहले कॉरिडोर नार्थ साउथ में निर्माण के लिए करीब 6500 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।
इसके अलावा अगर बात ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की भी की जाए तो 12000 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च होगा। भारत सरकार से 20 फीसदी, राज्य सरकार से 20 फीसदी और बाकी 60 फीसदी मदद बतौर ऋण विभिन्न संस्थाओं से ली जाएगी।
फिलहाल जापानी कंपनी जाइका पहले ही लखनऊ मेट्रो के लिए लोन देने की इच्छा जाहिर कर चुकी है। मगर कंपनी की एक शर्त यह है कि मेट्रो की बोगियों की खरीद भी इसी कंपनी से की जाए।
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मेट्रो सेल के चेयरमैन राजीव अग्रवाल ने बताया कि जितने भी मंत्रालयों से डीपीआर पास हुई है, उन सभी के अधिकारियों से मुलाकात की है।
मुख्य रूप से वित्त मंत्रालय गए, जहां ऋण संबंधी चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि अब उन्होंने मंत्रालय से एशियन डवलपमेंट बैंक (एडीबी) और यूरोपियन बैंक से भी ऋण लेने में मदद की बात कही है।
इसके अलावा कुछ भारतीय एजेंसियों को भी ऋण प्रणाली में जोड़ा जा सकता है।
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इस संबंध में मेट्रो सेल के चेयरमैन राजीव अग्रवाल ने कोशिशें शुरू कर दी है। उन्होंने गत दिनों दिल्ली में वित्त मंत्रालय से इस संबंध में वार्ता भी शुरू कर दी है।
मेट्रो परियोजना में बजट का एक बड़ा हिस्सा ऋण के तौर पर भी जुटाया जाएगा। इसके लिए फिलहाल जापानी कंपनी जाइका का नाम सबसे आगे था।
मेट्रो परियोजना के प्रस्तावित पहले कॉरिडोर नार्थ साउथ में निर्माण के लिए करीब 6500 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।
इसके अलावा अगर बात ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की भी की जाए तो 12000 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च होगा। भारत सरकार से 20 फीसदी, राज्य सरकार से 20 फीसदी और बाकी 60 फीसदी मदद बतौर ऋण विभिन्न संस्थाओं से ली जाएगी।
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फिलहाल जापानी कंपनी जाइका पहले ही लखनऊ मेट्रो के लिए लोन देने की इच्छा जाहिर कर चुकी है। मगर कंपनी की एक शर्त यह है कि मेट्रो की बोगियों की खरीद भी इसी कंपनी से की जाए।
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मेट्रो सेल के चेयरमैन राजीव अग्रवाल ने बताया कि जितने भी मंत्रालयों से डीपीआर पास हुई है, उन सभी के अधिकारियों से मुलाकात की है।
मुख्य रूप से वित्त मंत्रालय गए, जहां ऋण संबंधी चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि अब उन्होंने मंत्रालय से एशियन डवलपमेंट बैंक (एडीबी) और यूरोपियन बैंक से भी ऋण लेने में मदद की बात कही है।
इसके अलावा कुछ भारतीय एजेंसियों को भी ऋण प्रणाली में जोड़ा जा सकता है।