तीन दशक बाद फिर आमने सामने दो धुरंधर
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1984 के अमेठी लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी की हार के अहम किरदारों में शुमार संजय सिंह तीन दशक बाद फिर उनके सामने होंगे।
अमेठी में राजीव गांधी से मिली शिकस्त के बाद मेनका गांधी पहली बार अपने बेटे वरुण गांधी की राह आसान बनाने के लिए यहां पहुंच रही हैं तो संजय सिंह अपनी पत्नी अमीता सिंह के लिए मैदान-ए-जंग में डटे हैं।
बदले सियासी परिवेश में यहां चुनाव प्रचार के दिलचस्प होने के आसार बढ़ गए हैं। अपने पति संजय गांधी की मौत के बाद 1984 में मेनका गांधी ने संजय विचार मंच से अमेठी से चुनाव लड़ा था।
उनका सीधा मुकाबला अपने जेठ और कांग्रेस उम्मीदवार राजीव गांधी से था।
राजीव के थे करीबी
चुनाव में कभी संजय गांधी के साथ अपनी सियासी पारी शुरू करने वाले डॉ. संजय सिंह कांग्रेस उम्मीदवार राजीव गांधी के खास सारथी थे। उस चुनाव में मेनका गांधी को बड़ी शिकस्त मिली थी।
नतीजों के बाद मेनका ने चुनाव में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप भी लगाया था। तीन दशक बाद मेनका गांधी अपने पुत्र वरुण गांधी के चुनाव प्रचार के लिए मई के पहले हफ्ते में सुल्तानपुर पहुंच रही हैं।
सुल्तानपुर में मेनका का मुकाबला अन्य प्रत्याशियों के अलावा कांग्रेस प्रत्याशी अमीता सिंह से भी है।
अमीता सिंह का चुनाव संचालन उनके पति डॉ. संजय सिंह कर रहे हैं।
संजय ने की थी मेनका की खिलाफत
ऐसे में मेनका गांधी का सामना सांसद डॉ. संजय सिंह से होना एक बार फिर तय माना जा रहा है। अंतर केवल इतना है कि तब संजय सिंह ने राजीव गांधी के लिए मेनका की मुखालफत की थी।
इस बार वे अपनी पत्नी अमीता सिंह के लिए मैदान में हैं। मेनका गांधी भी खुद के बजाए बेटे वरुण गांधी के लिए संजय सिंह के सामने होंगी।
डॉ. संजय सिंह पहले से ही चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा प्रत्याशी वरुण गांधी पर लगातार हमलावर हैं।
मेनका गांधी के सुल्तानपुर पहुंचने के बाद कैसे सियासी हमले होंगे, यह भले ही अभी साफ न हो लेकिन प्रचार अभियान के दिलचस्प होने के आसार बढ़ गए हैं।