चार साल से सत्ता पर काबिज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बड़ी कामयाबी यह है कि उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए यूथ टीम तैयार कर लिया है। उन्होंने टीम में संघर्ष के दौर के साथियों पर भरोसा जताया है। उन्हें जिम्मेदारियां निभाने के लिए ताकतवर बनाया है। इस टीम की बदौलत सपा में युवा नेतृत्व उभरता दिखा है। यह और बात है कि सीएम से नजदीकियों के चलते इनमें से कई पर शीर्ष नेताओं की नजरें तिरछी भी हुईं। इस टीम के अधिकतर सदस्य वरिष्ठ नेताओं की गणेश परिक्रमा करने के बजाय मुख्यमंत्री कैंप में निष्ठा रखने वाले माने जाते हैं।
इन 10 सिपाहियों के दम पर 2017 का रण जीतेंगे अखिलेश
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अखिलेश 2012 में पूर्ण बहुमत की सरकार के मुखिया बने तो 2007 में मायावती सरकार बनने के बाद के संघर्ष वाले दिनों के साथियों को भी नहीं भूले। अखिलेश की टीम पर पार्टी नेतृत्व की गाज भी गिरी, लेकिन उन्हें पार्टी में किनारे नहीं होने दिया। संजय लाठर, सुनील सिंह साजन, आनंद सिंह भदौरिया समेत कई युवाओं का पार्टी से निष्कासन तक हुआ, पर अखिलेश ने उनकी ससम्मान वापसी कराई।
कमाल अख्तर : कैबिनेट मंत्री
जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष कमाल अख्तर सबसे लंबे समय तक युवा राजनीति से जुड़े रहे। वे समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय सचिव और फिर अध्यक्ष रहे। सपा ने उन्हें 2004 में राज्यसभा में भेजा। 2012 में वे अमरोहा की हसनपुर सीट से विधायक चुने गए। पहले पंचायतीराज विभाग के राज्य राज्यमंत्री रहे। अब खाद्य एवं रसद जैसा अहम महकमा है। सपा के आंदोलनों व साइकिल यात्राओं में शामिल रहे और जेल भी गए।
अभिषेक मिश्रा : राज्यमंत्री
आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व प्राध्यापक अभिषेक मिश्रा नौकरी छोड़कर राजनीति में आए। विदेश में पढ़ाई करने वाले अभिषेक 2012 में लखनऊ उत्तर सीट से पहली बार विधायक चुने गए। उन्हें उम्मीदवार बनाने में अखिलेश की अहम भूमिका थी। सीएम ने उन्हें व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास राज्यमंत्री बनाया। वे पुराने समाजवादी और आंदोलन से निकले हुए नेता तो नहीं है लेकिन मंत्री के रूप में उनकी कार्यशैली ने उन्हें सीएम के भरोसेमंद नेताओं की कतार में खड़ा कर दिया है।
यासर शाह : राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
पूर्व मंत्री वकार अहमद शाह के बेटे यासर शाह बहराइच की मटेरा विधानसभा सीट से 2012 में पहली बार विधायक चुने गए। अखिलेश सरकार में पिता श्रम मंत्री थे। गंभीर रूप से बीमार होने पर उन्हें मंत्रिपरिषद से हटाया गया तो यासर ऊर्जा राज्यमंत्री बने। पिछले कैबिनेट फेरबदल में शाह को प्रोन्नत करके परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। यासर बसपा सरकार के खिलाफ आंदोलनों में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे।