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मीटिंग में मार्केटिंग का फंडा
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 05 Mar 2014 01:08 PM IST
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पिछले दिनों मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर साहित्यकारों का एक जलसा था। चर्चा पुरस्कारों तक पहुंच गई।
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एक चर्चित कवयित्री ने ‘यश भारती’ पुरस्कार पाने के अपने अनुभव को साझा किया। जैसे ताक में बैठे दूसरे साहित्यकार को सीएम के सामने अपने एक साथी की मार्केटिंग का मौका मिल गया।
वरिष्ठ साहित्यकार ने जिस अंदाज में अपने साथी लेखक के हवाले से सरकार के कामों का बखान किया, जलसे में ही चर्चा शुरू हो गई कि उनका भी ‘यश भारती’ पक्का हो गया।
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कार्यक्रम से यह भी पता चला कि आवेदन करने वाले ही पुरस्कार पाएं यह पक्का नहीं, पुरस्कार तो उन्हें मिलता है जिन्हें कहकर आवेदन कराया जाता है।