यह है आग पर बैठकर तपस्या करने वाले बाबा की 'असली' कहानी
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ज्येष्ठ माह की भरी दोपहरी की तपिश से जहां धरती और आसमान से आग की तरह गर्मी बरस रही है। वहीं एक संत द्वारा धूप में बैठकर तपस्या कर रहा है। इस संत ने अपने चारों ओर आग जला रखी है। यही नहीं उसने आग से चल रहा एक पात्र अपने सर के ऊपर भी रख रखा है। संत के इस काम से लोगों के बीच कौतुहल और जिज्ञासा बनी हुई है।
रोज सैकड़ों की संख्या में महिला, पुरुष व बच्चे ऐसे संत की साधना के दर्शनार्थ पहुंच रहे हैं। मामला यूपी के सीतापुर जिले का है। जनपद से ४५ किमी की दूरी पर बिसवां-बहराइच मार्ग पर बसे जहांगीराबाद कस्बे के उत्तरी किनारे पर बह रही किवानी नदी के तट पर स्थित बाबाविश्वंभर दास की कुटी पर बीते छह मई से एक संत खुले आसमान के नीचे बैठकर अपने चारों ओर लकड़ी व ओपलों से आग जलाकर साधना कर रहे हैं। बाबा साधना क्यों कर रहे हैं इस बारे में आपको पता नहीं चल पाएगा क्योंकि बाबा खुद मौन हैं।
साधक क्या कहते हैं
बाबा के साथ मौके पर मौजूद साधक के शिष्य सर्वेश कुमार उर्फ बाजपेयी बाबा ने बताया कि इन संत का नाम मौनी बाबा है। यह पैतृक रूप से ग्राम समैसा, धौरहरा जनपद लखीमपुर खीरी के हैं। इन्होंने करीबन ३५ से ४० वर्ष पूर्व घर छोड़ दिया था। वह इधर-उधर कुटियों पर घूमते रहते थे।
इसके बाद वह परम संत त्यागी बाबा के शिष्य बन गए और मौन धारण कर १२ वर्षों की कठोर तपस्या का व्रत लिया। इस समय इनको साधना करते हुए दस वर्ष पूरे हो रहे हैं। अभी दो वर्ष और तपस्या चलेगी।
साधना में लीन मौनी बाबा के दूसरे शिष्य बाबा शांती दास ने बताया कि बाबा ने जब से साधना का प्रण लिया है। तब से बोलते नहीं है। केवल इशारे से वह लिखकर बताते हैं। वह दस वर्षों से निराहार रह रहे हैं जो आगे भी रहेंगे। उनके अंदर आग को सहने की यह ताकत पिछले कई सालों से है। उनके शरीर ने आग की तपिश को बंद करना बंद कर दिया है। ऐसा बाबा जी की साधना की वजह से हुआ है।
केवल पानी पीते हैं बाबा
बाबा जी केवल जल व नींबू पानी पीते हैं। उनका शिष्य बाजपेयी बाबा भी निराहार रहता है। साधना के उददेश्य के बारे में पूछने पर बताया कि इस साधना का उनका मु य उददेश्य गुरु सेवा व संत दर्शन है। बाबा जी प्रत्येक ज्येष्ठ के महीने में ऐसा तप करते हैं। यहां पर पांच दिन के लिए संकल्प लिया है, जो दस मई को पूरा होगा।
रविवार को पूर्वांह ग्यारह बजे अपने साधना स्थल से उठकर बाहर आएंगे। तब तक पांच दिनों तक दिन व रात उसी स्थान पर बैठकर तपस्या में लीन रहेंगे।
बाबा विश्वंभर दास उर्फ बनिया बाबा ने बताया कि बाबा के बाहर आने पर हवन पूजा आदि संपन्न होगा तथा संत स्नान होगी। बाद में ग्यारह मई को इसी स्थान पर विशाल भंडारा व रासलीला का भी मंचन होगा। फिलहाल इन दिनों नदी केकिनारे स्थित कुटी पर लगातार संत दर्शन व परिक्रमा के कार्य चल रहा है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।