बाबर के सेनापति मीर बाकी ने 1528-29 में करवाया था अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण
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बाबर के आदेश पर 1528-29 में बाबरी मस्जिद का निर्माण कराने वाला मीर बाकी मुगल सम्राट बाबर का प्रमुख सेनापति था। वह ताशकंद (मौजूदा उजबेकिस्तान का एक शहर) का मूल निवासी था। बाबर ने उसे अवध प्रदेश का शासक नियुक्त किया था। ऐतिहासिक दस्तावेजों में जनवरी-फरवरी 1526 में बाकी की चर्चा शाघावाल नाम से मिलती है।
उस वक्त उसे लाहौर के पास दिबलपुर का इलाका दिया गया था। उसे अफगानिस्तान के बल्ख में एक विद्रोही को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। बाकी जब इस अभियान से लौटा तो उसे चिन तिमूर सुल्तान के नेतृत्व में 6-7 हजार सैनिकों का कमांडर बनाया गया।
1528 में सेना की इस टुकड़ी को दुश्मनों से मुकाबले के लिए चंदेरी भेजा गया, लेकिन बाकी को इस अभियान में कामयाबी नहीं मिली। दुश्मन भाग गए और चिन तिमूर सुल्तान को उसका पीछा करने को कहा गया लेकिन बाकी को वहीं रोक दिया गया।
हालांकि, चिन तिमूर सुल्तान के नेतृत्व वाली सेना बयाजिद और बिबन (इब्राहिम लोदी के पूर्व कर्मचारी) से जीत नहीं सकी और लखनऊ का किला मुगलों के हाथ से निकल गया। मुगल सेना की हार के लिए बाकी को जिम्मेदार बताया गया। हालांकि, बाबर ने 1529 में फिर से इस किले पर कब्जा कर लिया, लेकिन वह बाकी से बेहद नाराज था।
20 जून, 1529 को बाबर ने बाकी को सेना से निकाल दिया। बाबरनामा में बाकी का इतना ही जिक्र मिलता है। इसके बाद 1813 में ईस्ट इंडिया कंपनी के सर्वेयर फ्रांसिस बुकानन ने मीर बाकी का नाम बाबरी मस्जिद से जोड़ा।
बाकी ने मस्जिद के लिए रामकोट को चुना था, मुस्लिम करते हैं इनकार
- बाबरनामा में मीर बाकी की कई नामों से चर्चा की गई है। उसे मीर ताशकंदी, बाकी शाघावाल, बाकी बेग और बाकी मिंगबाशी नामों से उसकी चर्चा मिलती है। लेकिन बाबरनामा में कहीं उसके लिए मीर नाम का प्रयोग नहीं किया गया है। माना जाता है कि फ्रांसिस बुकानन ने 1813-14 में बाकी के नाम के आगे मीर लगाया।
- मस्जिद के शिलालेखों के अनुसार बाबर के आदेश पर मीर बाकी ने 1528-29 में इसका निर्माण कराया था। बाकी ने मस्जिद बनाने के लिए रामकोट यानी राम के किले को चुना था। कहा जाता है कि मस्जिद बनाने के लिए उसने यहां पहले से मौजूद भगवान राम के मंदिर को तोड़ दिया था। हालांकि, मुस्लिम पक्षकार यहां मंदिर के होने से इंकार करते हैं, लेकिन 19वीं सदी की शुरुआत के साथ ही यह हिंदू-मुसलमानों के बीच बड़े विवाद के कारण के रूप में तब्दील होने लगा।