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पढ़ाकू अपने जेबखर्च के लिए बन रहे सॉल्वर
संजय त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Mon, 07 Oct 2013 01:34 AM IST
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अफसरी की नौकरी पाने की चाहत रखने वाले पढ़ाकू अपने जेबखर्च के लिए खुद सॉल्वर बन रहे हैं और मास्टर माइंड द्वारा पार्टटाइम जॉब के बहाने सॉल्वर बनाए भी जा रहे हैं।
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विकासनगर क्षेत्र में आईटीबीपी के सिपाही की परीक्षा देते धरे गए पांचों सॉल्वर खुद के लिए अच्छी नौकरी की तैयारी में जुटे थे।
उन्होंने पांच से सात हजार रुपये में दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने का जुर्म कबूला। वहीं, तीन सॉल्वरों के तार अलीगंज के एक कोचिंग सेंटर से जुड़े होने पर बड़े गैंग का भी हाथ माना जा रहा है।
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भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल में आरक्षी पशु परिवहन यानी घुड़सवार सिपाही की भर्ती के लिए लिखित परीक्षा में पांच सॉल्वर व एक अभ्यर्थी को गिरफ्तार किया गया।
इनमें फैजाबाद के महाराजगंज क्षेत्र के गांव ज्ञानपुर का विवेक सिंह एमएससी करके सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुटा है।
उसने कबूला कि फैजाबाद के विश्वविद्यालय के छात्र संदीप त्रिपाठी ने उसे राधाकृष्ण के स्थान पर परीक्षा देने के लिए आठ हजार रुपये दिए थे।
अलीगंज की एक कोचिंग से भी उसका जुड़ाव है। इसी कोचिंग में एसएससी की तैयारी कर रहे सीतापुर के लहरपुर के महमूदपुर निवासी पवन वर्मा ने हाथरस के सादाबाद निवासी धर्मेंद्र सिंह के स्थान पर परीक्षा देने के पांच हजार लिए थे।
दोनों की कोचिंग सेंटर पर मुलाकात हुई थी। मुंगेर (बिहार) के जमालपुर थाने के फरीदपुर निवासी शैलेंद्र कुमार मंडल ने छह हजार में संदीप कुमार के स्थान पर परीक्षा देने का जुर्म कबूला।
अलीगढ़ के इदलास थाने के गांव मई निवासी नेत्रपाल सिंह अलीगढ़ के ही कुलदीप सिंह के स्थान पर परीक्षा देने आया था। उसे सिर्फ दो हजार रुपये मिले थे।
आगरा के शमशाबाद थाने के नया बांस निवासी महेश सिंह ने पांच हजार में आगरा के ही मनीष कुमार तोमर के स्थान पर परीक्षा देने की बात कबूली।
विवेक की तरह यह चारों भी स्नातक के बाद अफसरी की नौकरी पाने की तैयारी में जुटे हैं। एसओ विकासनगर अशोक यादव ने बताया कि पकड़े गए सॉल्वरों में से तीन के तार एक कोचिंग सेंटर से जुड़े होने के बिंदु पर जांच चल रही है।
पता लगाया जा रहा है कि किसी गिरोह ने उन्हें मामूली रकम देकर परीक्षा देने भेजा था या अभ्यर्थी खुद ही उनके संपर्क में आए थे।
इसी तरह आगरा के महेश सिंह व अलीगढ़ के नेत्रपाल सिंह के बारे में पड़ताल की जा रही है। हत्थे चढ़े अभ्यर्थी धर्मेंद्र सिंह से पूछताछ की गई है तथा अन्य चार अभ्यर्थियों से भी तहकीकात की जाएगी।
तीन सॉल्वरों के तार किसी गैंग से जुड़े होने की आशंका है, जबकि दो से पूछताछ के बाद ही खुलासा हो सकेगा।
दूसरे के स्थान पर परीक्षा देते गिरफ्तार विवेक सिंह ने पूछताछ में बताया कि उसके पिता मेजर महेंद्र सिंह असम रायफल्स में तैनात थे और 1997 में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए।
इसके बाद उसने पढ़ाई पूरी की। हर परीक्षा में अव्वल रहा और एमएससी के बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा था। जेब खर्च निकालने के लिए वह दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने आया था।