चिकित्सा विशेषज्ञों ने दी बजट पर राय, बोले- कोई बड़ी घोषणा नहीं पर सेहत सुधार के किए प्रावधान
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केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए बजट के बारे में चिकित्सा विशेषज्ञों ने चर्चा कर अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने उम्मीद के मुताबिक चिकित्सा क्षेत्र में बजट प्रावधान नहीं किया है, लेकिन टैक्स स्लैब बढ़ाकर सभी वर्गों को राहत दी है। इसी तरह प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलेगा। जब संस्थागत प्रसव अधिक होंगे तो बाल एवं महिला मृत्युदर में गिरावट आएगी।
सरकार ने भारत को प्रदूषण मुक्त राष्ट्र बनाने के लिए इलेक्ट्रिकल वाहनों और नवीकरण ऊर्जा पर विशेष ध्यान देने की प्रतिबद्धता दोहराई है। इससे सांस, हृदय, चर्मरोग सहित विभिन्न बीमारियों पर नियंत्रण हो सकेगा। इसी तरह सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
शहरी हो या ग्रामीण सभी इलाके में बीमारी की बड़ी वजह गंदा पानी होता है। यदि लोगों को शुद्ध पेयजल मिलने लगेगा तो बीमारियां अपने आप नियंत्रित होने लगेगी। इस तरह देखा जाए तो बजट में सीधे तौर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में कोई खास प्रावधान नहीं किया गया है लेकिन सेहत सुधारने के प्रावधान पर्याप्त हैं। सड़क, रेल व बिजली के लिए किए गए प्रावधानों का फायदा तो हर वर्ग को मिलेगा।
चर्चा में लोहिया अस्पताल के निदेशक डॉ. डीएम नेगी, डा. ओंकार यादव, डॉ. सरिता सक्सेना, डॉ. एपी पांडेय व डॉ. एमएन मिश्रा शामिल रहीं।
केजीएमयू के अलग-अलग विभागों के विभागाध्यक्ष बोले- चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा की अनदेखी
सरकार ने बजट में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किया है। चिकित्सा शिक्षा को बढ़ाने के लिए नए-नए संस्थान खोलने की जरूरत है ताकि अधिक से अधिक विशेषज्ञ तैयार किए जा सकें। चिकित्सा व्यवस्था के आधारभूत ढांचे को अत्याधुनिक करने की रणनीति होनी चाहिए।
अभी हम प्राथमिक, सामुादायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं जिला अस्पताल में मरीजों के दिल, न्यूरो संबंधी व गैस्ट्रो संबंधी बीमारियों का इलाज नहीं कर पा रहे हैं। चिकित्सकों के साथ ही चिकित्सा संसाधनों की भारी कमी है। ऐसे में मरीजों को मेडिकल कालेजों, पीजीआई और एम्स की ओर से भागना पड़ता है। इसका दोहरा नुकसान है।
एक तरफ मरीज को चिकित्सा सुविधाओं के लिए बड़े संस्थानों की भाग दौड़ करनी पड़ती है तो दूसरी तरफ वहां मरीजों की भीड़ बढ़ने से शोध और शैक्षिक काम प्रभावित होते हैं। इसका असर भविष्य पर पड़ता है। इस बार के बजट में टैक्स स्लैब बढ़ाया गया है, यह बेहतरीन कदम है।
चर्चा में प्रोफेसर व प्लास्टिक सर्जन डॉ. विजय कुमार, प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष मेडिसिन विभाग डॉ. अनूप वर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर इमरजेंसी मेडिसिन डॉ. अविनाश अग्रवाल, प्रोफेसर व ट्रॉमा प्रभारी डॉ. सुरेंद्र कुमार, प्रोफेसर एनाटॉमी डॉ. नवनीत कुमार व गैस्ट्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. सुमित रूंगटा शामिल हुए।