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करोड़ों बच्चों को लगेगा रुबेला का टीका, पांच सप्ताह तक चलेगा अभियान

Tue, 17 Jul 2018 04:33 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 17 Jul 2018 04:33 PM IST
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measles rubella vaccination campaign will start from 24 september
- फोटो : डेमो

मीजल्स रुबेला (जर्मन खसरा) से बचाव के लिए प्रदेश के 7.64 करोड़ बच्चों का मुफ्त टीकाकरण किया जाएगा। 24 सितंबर से शुरू होने वाला यह अभियान पांच सप्ताह तक चलेगा। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 9 माह से 15 वर्ष तक के बच्चों को यह टीका लगाया जाएगा। राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. एपी चतुर्वेदी ने बताया कि खसरे का टीकाकरण अभी तक नौ माह और 16 महीने पर लगता है।

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जिन बच्चों को पहले खसरा का टीका लगा है। उसे भी दोबारा यह टीका लगवाना होगा, क्योंकि ये विशेष तौर पर जर्मन खसरा से बचाव के लिए है। इस अभियान के लिए जरूरी तैयारियों का प्रस्तुतीकरण मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय को भी दिया गया है। डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि यह बीमारी हवा में काफी तेजी से फैलता है। एक व्यक्ति के खांसने या छींकने से दूसरे को इसका संक्रमण हो सकता है।
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रुबेला में हल्का बुखार और ददोरे जैसे दाने होते हैं और यह बीमारी गर्भवती महिला को हो तो उसका बच्चा अपंग पैदा हो सकता है। इस स्थिति को कांजेनाइटल रुबेला सिंड्रोम (सीआरएस) कहा जाता है। ऐसे बच्चे को कान व आंख संबंधी विकृतियां होती हैं या फिर दिमागी तौर पर बच्चा कमजोर हो सकता है। तो कई बच्चे इससे मधुमेह के शिकार हो सकते हैं। इस बीमारी का सर्वाधिक डर उन देशों में होता है, जहां बच्चों व महिलाओं में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।

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खतरनाक है रुबेला

measles rubella vaccination campaign will start from 24 september
वर्ष 2005 में भारत में कांजेनाइटल रुबेला सिंड्रोम के सिर्फ 238 बच्चे थे। वर्ष 2014 में यह संख्या बढ़कर 4,146 हो गई। इसी बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए सरकार मीजल्स रुबेला टीकाकरण को अभियान में शामिल करने का फैसला किया है। भारत में अभी भी हर साल 38 हजार बच्चे खसरे से जुड़े हुए कारणों से हर साल मरते हैं।

जिन बच्चों को खसरा होता है, उनकी प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। बार-बार दस्त व निमोनिया जैसी बीमारियों का शिकार होते हैं। इन बच्चों की उम्र आमतौर से पांच साल से कम होती है। अभी तक मीजल्स रुबेला का टीका लगभग 9.20 करोड़ बच्चों को 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लगाया जा चुका है।
 
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