लड़कियों ने हॉस्टल की खिड़की से झांका तो लटकती मिली लाश
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लखनऊ के मोहान रोड स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विवि से एमबीए थर्ड सेमेस्टर की पढ़ाई कर रही आस्था सिंह (22) ने बुधवार दोपहर फांसी लगाकर जान दे दी। उसका शव हॉस्टल के फर्स्ट फ्लोर स्थित रूम में लटका पाया गया।
पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव निकाला। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। सीओ आलमबाग राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि छात्रा कुछ समय से तनाव में रहती थी। आत्महत्या के पीछे कारण का पता लगाया जा रहा है।
आस्था, गाजीपुर के लाल दरवाजा निवासी ठेकेदार वीरेंद्र सिंह की इकलौती बेटी थी। यहां वह बीए सेकंड ईयर की छात्रा ज्योति मिश्रा के साथ कमरा नंबर 140 में रहती थी। दोनों की परीक्षाएं चल रही थी।
बुधवार सुबह नौ बजे ज्योति नाश्ता करने के बाद एग्जाम देने चली गई। आस्था का दोपहर एक बजे दूसरी पाली में एमआईएस का पेपर था। दोपहर लगभग डेढ़ बजे तक कमरा बंद देख पड़ोस के कमरे में रहने वाली छात्रा आस्था पांडेय ने दरवाजा खटखटाया।
भाई की मौत से तनाव में थी छात्रा
कोई जवाब न मिलने पर आसपास के कमरों में रहने वाली छात्राएं एकत्र हो गईं और खिड़की से झांककर देखा तो आस्था सिंह का शव खिड़की की रॉड से दुपट्टे के फंदे से लटका हुआ था। हॉस्टल में हड़कंप मच गया।
वॉर्डन बिंदु सिंह, वीसी डॉ. निशीथ राय सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और पुलिस को खबर की। छात्रा के रिश्तेदार सुनील सिंह को भी बुलवा लिया गया। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव निकाला।
एसओ अशोक यादव ने बताया कि मरने से पहले छात्रा ने कोई सुसाइड नोट नहीं लिखा है। छात्रों ने मौत की वजहों की गंभीरता से जांच कराने और परीक्षाएं कैंसिल करने की मांग रखी।
पुलिस ने बताया कि आस्था के छोटे भाई हर्ष उर्फ गोलू की करीब दो माह पहले बीमारी से मौत हो गई थी। उसके बाद से वह तनाव में रहती थी। घर पर पिता और मां सुधा के अलावा भाई शिखर उर्फ यश हैं। मां प्राइमरी टीचर है।