'दलितों का अपमान रोकने के लिए भाजपा गंभीर नहीं, मजबूरी में करती है फैसला'
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि भाजपा नेतृत्व दलितों का अपमान रोकने के प्रति तनिक भी गंभीर नहीं है। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई केवल दिखावटी व खानापूर्ति भर है।
बसपा अध्यक्ष ने एक बयान जारी कर भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मधु मिश्रा के बयान की कड़ी निंदा की और भाजपा से उसके निष्कासन की कार्रवाई को 2017 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मजबूरी में लिया गया फैसला बताया।
मायावती ने कहा कि भाजपा दलित सम्मान के मामले में यदि इतनी ही गंभीर है तो उसे केंद्रीय मंत्री जनरल (रिटायर) वीके सिंह के खिलाफ सबसे पहले कार्रवाई करनी चाहिए।
मायावती ने कहा कि भाजपा एंड कंपनी का चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा से ही घोर जातिवादी व दलित-विरोधी रहा है।
दलितों से बुरा व्यवहार करने में पीछे नहीं भाजपा
मायावती ने कहा, यही वजह है कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद पार्टी में उच्च पदों पर बैठे लोग भी दलितों का अपमान करने व उनके खिलाफ जातिवादी व्यवहार करने में पीछे नहीं रहते हैं।
वीके सिंह के बयान के बावजूद न तो प्रधानमंत्री ने उनके खिलाफ कार्रवाई की और न ही भाजपा नेतृत्व ने कुछ किया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व की नीयत अगर थोड़ी भी साफ होती तो मधु को निलंबित करने से पहले केंद्रीय मंत्री को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करती।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हैदराबाद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के उत्पीड़न व शोषण से मजबूर होकर रोहित वेमुला की आत्महत्या मामले में भी केंद्र का रवैया दलित-विरोधी बना हुआ है। इस मामले की न्यायिक जांच चल ही रही है और कुलपति को यूनिवर्सिटी जॉइन करने भेज दिया गया।