मुजफ्फरनगर दंगों की रिपोर्ट को मायावती ने बताया लीपोपोती
- देश में अब सुरक्षित नहीं हैं गरीब और दलित
- यूपी में दलितों को न्याय मिलना मुश्किल
- दंगों में भाजपा और सपा की थी मिलीभगत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बसपा प्रमुख मायावती ने मुजफ्फरनगर दंगों पर पेश हुई सहाय आयोग की रिपोर्ट पर अपना बयान दिया। मायावती ने विष्णु सहाय आयोग की रिपोर्ट को लीपापोती करने वाली बताया है। मायावती ने कहा है कि दंगों पर आयोग की इस रिपोर्ट में लीपापोती करके राज्य सरकार को बचाने की कोशिश की गई है।
मायावती ने कहा कि केंद्र में भाजपा और यूपी में सपा दोनों ही गरीबों, महिलाओं, बेरोजगारों, दलितों और मुस्लिम समाज को सुरक्षा और न्याय नहीं दे रही हैं। मुस्लिम समाज के लोगों को जान माल और मजहब की सुरक्षा और न्याय मिल पाना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव नजर आ रहा है।
दलित वर्ग के लोगों को अब आगे सतर्क रहना होगा और अपने हित की रक्षा के लिए राजनीतिक कदम भी उठाने होंगे। बसपा प्रमुख मायावती ने आगे कहा कि मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान लोगों के जान-माल की व्यापक हानि हुई क्योंकि प्रदेश की सपा सरकार की भाजपा से साफ तौर पर मिलीभगत थी।
यूपी में दंगा करने वाले खुलेआम हीरो बने घूम रहे हैं
दंगों में व्यापक जान-माल की हानि के साथ-साथ बड़े पैमाने पर घर-बार छोड़कर पलायन करने वाले लोगों के प्रति भी सपा सरकार का रवैया काफी असंवेदनशील व अमानवीय बना रहा था।
भाजपा के लोगों ने भी इन दंगों में पीड़ित लोगों को इंसाफ दिलाने की बात कही थी। इस मामले में सपा सरकार का रवैया पूरी तरह से लचर और विफल साबित हुई।
मायावती ने कहा कि दंगाई, बलवाई, हत्यारे व दंगा भड़काने का षडयंत्र करने वाले लोग इस सपा सरकार के अत्याधिक लचर रवैये के कारण खुलेआम हीरो बने घूमते रहे।
इसी कारण अंत में जनता के दबाव में सपा सरकार को न्यायिक आयोग बनाने को मजबूर होना पड़ा। मगर अब इस जांच रिपोर्ट ने भी इंसाफ पसंद लोगों को मायूस किया है।
आयोग का मकसद सरकार को क्लिनचिट देना होता है
मुजफ्फरनगर दंगे पर आयोग की रिपोर्ट से इस आरोप को भी बल मिलता है कि वास्तव में न्यायिक जांच आयोग का सही मकसद दोषियों को सज़ा व पीडि़तों को न्याय दिलाना नहीं होता है। बल्कि सरकारों को क्लीन चिट देना व मामले को रफा-दफा करना व लीपापोती करना होता है।
पूर्व में यही काम कांग्रेस व भाजपा की सरकारें भी लगातार करती रही हैं। मायावती ने कहा कि सहाय जांच आयोग रिपोर्ट ने काफी निचले स्तर पर छोटे पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों पर दोष डालकर अपनी रिपोर्ट का खुद ही उपहास उड़ाया है क्योंकि ऐसी रिपोर्टें शायद कमिश्नर स्तर पर भी नहीं लिखी जाती है।
इतने बड़े व सुनियोजित दंगे में राज्य सरकार को एक प्रकार से क्लीनचिट दे देना वास्तव में व्यवस्था पर से भरोसा उठाने वाला कदम है। मायावती ने कहा कि इसका दुष्परिणाम तो अखिलेश यादव सरकार को अवश्य ही झेलना पड़ेगा।