मायावती को मिला 'मौका', जोरदार हमले करेंगी
बसपा सुप्रीमो मायावती रविवार को सूबे के राज्यमंत्रियों से जुड़ी घटनाओं के बहाने कानून-व्यवस्था पर प्रदेश सरकार को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर सकती हैं।
कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर हमेशा कड़े हमले बोलने वाली मायावती को सरकार के कुछ मंत्रियों ने बैठे-ठाले नया मुद्दा दे दिया है।
बसपा सुप्रीमो ने प्रदेश में संगठन के कामकाज की समीक्षा और बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर राजधानी में डेरा डाल दिया है। वे अप्रैल में दिल्ली जाने के बाद लखनऊ लौट आई हैं।
जानकार बताते हैं कि मायावती ने दिल्ली से लौटने के बाद पार्टी के कुछ नेताओं से सूबे की सियासी माहौल पर चर्चा की है। राज्यमंत्री राम मूर्ति सिंह वर्मा, विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह और कैलाश चौरसिया से जुड़े मामले की भी उन्हें जानकारी दी गई।
15 जून को होगी अहम बैठक
माना जा रहा है कि मायावती इन घटनाओं के बहाने सूबे की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर कड़े हमले बोल सकती हैं। हालांकि आगे रमजान के मद्देनजर तत्काल किसी बड़े आंदोलन के ऐलान की संभावना नजर नहीं आ रही है।
मायावती ने 15 जून को पार्टी के कोआर्डिनेटरों की बैठक बुलाई है। इसमें संगठन के कामकाज की प्रगति की समीक्षा करेंगी। मायावती ने बूथ स्तर तक संगठन को नए सिरे से खड़ा करने के साथ ही 50 प्रतिशत युवाओं को जोड़ने का निर्देश दिया था।
वे 27 अप्रैल को प्रदेश स्तर पर संपन्न हो चुके धरना-प्रदर्शन की समीक्षा भी करेंगी। यह आंदोलन आमतौर पर सफल माना गया लेकिन कई जिलों में आपसी प्रतिद्वंद्विता और लोगों की कम उपस्थिति भी सामने आई थी।
बलिया में एक जोनल कोआर्डिनेटर के खिलाफ दुष्कर्म से जुड़े मामले की शिकायत सामने आई है। समझा जाता है कि इस कोआर्डिनेटर के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।