यूपी चुनाव की तैयारियों के बीच मायावती का बड़ा प्रयोग, सभी भाईचारा कमेटियां भंग की, अब ब्राह्मणों पर फोकस
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने नए सिरे से ब्राह्मण, पिछड़ा, क्षत्रिय भाईचारा कमेटियों के गठन की कार्यवाही के बीच ही उसे भंग कर दिया है। अब भाईचारा कमेटियों के ब्राह्मण, क्षत्रिय, पिछड़े, मुस्लिम नेता सेक्टर व मंडल के मूल संगठन में शामिल कर दिए गए हैं। मायावती ने अपरकास्ट के पार्टी के पूर्व मंत्रियों व प्रभावशाली नेताओं को मंडलों में मुख्य जोन कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी है।
बसपा के एक जिम्मेदार पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी की भाईचारा कमेटियों के गठन के बीच कई जगह विरोधी यह आरोप लगाते सुने गए कि बसपा मूल संगठन में अनुसूचित जातियों को छोड़ किसी अन्य समाज को जिम्मेदारी नहीं दी जाती है। पार्टी अन्य जातियों से जुड़े नेताओं को केवल जातीय भाईचारा कमेटियां बनाकर चुनावी लाभ लेने का काम करती है। इनकी पार्टी संगठन में कोई भूमिका नहीं होती है। बसपा अध्यक्ष ने इसके बाद तत्काल प्रभाव से सभी भाईचारा कमेटियों को भंग कर दिया है।
उन्होंने भाईचारा कमेटियों में शामिल ब्राह्मण, ठाकुर, पिछड़े व मुस्लिम नेताओं को मंडल व सेक्टर स्तर के मूल संगठन में समायोजित कर दिया है। इससे विपक्षी दलों के दुष्प्रचार से बचा जा सकेगा। ब्राह्मणों पर खास फोकस है।
इन्हें दी गई जिम्मेदारी
जानकारी के मुताबिक पूर्व शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र को मिर्जापुर मंडल, पूर्व एमएलसी ओपी त्रिपाठी को देवीपाटन मंडल के चीफ कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह अरुण पाठक को आजमगढ़ मंडल और वीरेंद्र पांडेय को गोरखपुर मंडल की जिम्मेदारी दी गई है।
अन्य मंडलों में भी इसी तरह प्रभावशाली नेताओं को जिम्मेदारी देने की कार्यवाही चल रही है। ये पदाधिकारी न सिर्फ ब्राह्मण समाज बल्कि अपरकास्ट के सभी समाज से जुड़े लोगों को बसपा से जोड़ने का काम करेंगे।