ऑडियो क्लिप में खुल रहे हैं मायावती-नसीमुद्दीन के कई राज, यहां पढ़ें क्या हैं इसमें
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बसपा से निकाले जाने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मीडिया में मायावती से बातचीत की ऑडियो क्लिप जारी की। पढ़ें- क्या हुई मायावती व नसीमुद्दीन में बातचीत-
नसीमुद्दीन सिद्दीकी और मायावती के बीच बातचीत
ऑडियो क्लिपिंग नंबर -1
हैलो! बहनजी बात करेंगी...। (कुछ देर फोन होल्ड और फिर मायावती की आवाज)
मायावती : हैलो!
नसीमुद्दीन : जी बहनजी आदेश।
मायावती : हां भाई! नोट करो।
नसीमुद्दीन : जी बहनजी।
मायावती : जो चारों मंडल हैं?
नसीमुद्दीन : जी बहनजी।
मायावती : मेरठ मंडल, सहारनपुर मंडल, मुरादाबाद मंडल और बरेली मंडल में जिनको आपने मेंबरशिप की किताबें दिलवाई हैं। उनको बोलो कि वह अपना हिसाब इधर दफ्तर में जमा कर दें। और 9 तारीख को उनको बुला लो। अपना भी हिसाब भेज दो अमरपाल शर्मा की सीट वाला।
नसीमुद्दीन : जी बहनजी, कल उनसे बात हुई थी।
मायावती : (गुस्से से भरी आवाज) वो छोड़ो, मैं टेलीफोन पर बात नहीं करना चाहती। (बीच में नसीमुद्दीन की बोलने की कोशिश) सिद्दीकी : बहनजी।
टिकट दिलवाने पर हुई बातचीत
मायावती : आप पहले उनको बुलवाओ।
नसीमुद्दीन : मैंने नहीं दिलवाई बहनजी। अतर सिंह राव थे व जिलाध्यक्ष थे। सब लोग पीछे पड़कर दिलवाए थे।
मायावती : चलो छोड़ो। आप उनको बुलवाओ। वो निचली समाज के लोग हैं। आप अपनी जिम्मेदारी समझो। टिकट तो आपने दिलवाया था।
नसीमुद्दीन : बहनजी टिकट मैं नहीं... चाह रहा था। आपने ही बुलवाकर..। (मायावती बात काटते हुए)
मायावती : छोड़ो! चाहे जो कुछ भी हो। आप अपनी जिम्मेदारी निभाओ।
नसीमुद्दीन : नहीं! जो भी आप जिम्मेदारी देंगी, उसे निभाना है बहनजी। मैंने न कोई मेंबरशिप की किताब दी है और न दिलाई है।
मायावती : भागो नहीं, अपनी जिम्मेदारी को निभाओ।
नसीमुद्दीन : नहीं बहनजी, भागकर कहां जाऊंगा।
मायावती : नहीं, अच्छी बात नहीं है यह। मैंने जो नए लोग लगाए हैं। उनको ये लोग कोऑपरेट नहीं कर रहे हैं। मैं एक्शन लूंगी इनके खिलाफ।
नसीमुद्दीन : बहनजी जो आपका आदेश होगा। असल बात यह है कि वहां से मेरे को हटाने के बाद मेरी बात कोई नहीं सुन रहा है।
मायावती ने कहा, टेप होता है मेरा फोन
मायावती (बीच में बात काटते हुए) : छोड़ो, इधर ही आकर मेरे से बात करना। मेरे से टेलीफोन पर मत बात करो। मेरा टेलीफोन टेप होता है।
नसीमुद्दीन : ठीक है बहनजी।
मायावती : तो आप उनको 9 तारीख की शाम को 4 बजे इधर बुला लो।
नसीमुद्दीन : मैं बुलाता हूं बहनजी।
मायावती : इधर रेजीडेंस पर बुलाओ और सब अपना हिसाब-किताब लेकर आएं।
नसीमुद्दीन : मैं कहता हूं बहनजी।
मायावती : हां, उनको बोलो, क्योंकि हमें मेंबरशिप का राउंडअप करना है हिसाब-किताब। यहीं लखनऊ लेकर आएं। दफ्तर में जमा कराएं और फिर मुझे हिसाब दें। और 9 तारीख की शाम को 4 बजे आप भी रहेंगे साथ में।
नसीमुद्दीन : मैं रहूंगा बहनजी। कर लेता हूं। जहां जाना है, वहां रोक लेता हूं।
मायावती : (बात काटते हुए) हां, कोई बात नहीं। रोक लो, मुझे ये भी हिसाब राउंडअप करना है।
नसीमुद्दीन : जी बहनजी। बहनजी, मैंने नहीं दिलवाई है।
मायावती : (फिर गुस्से में बात काटते हुए) अभी छोड़ो! मैं, मैं टेलीफोन पर ज्यादा बात नहीं करना चाहती। उधर कुछ भी बोले, उसका रिकॉर्ड रूम मैंने चेक किया है। अब मेंबरशिप की किताबें..(बीच में कुछ सुनाई नहीं देता, फिर आवाज सुनाई देती है) ये गरीब और मजलूमों की पार्टी है। तो हम इसका हिसाब जनता को देंगे।
नसीमुद्दीन : (बीच-बीच में) जी बहनजी, जी बहनजी।
मायावती : इसलिए उनको बोलो कि 9 तारीख की शाम को आएं और आप भी आएं। आपका जो भी काम है या पर्सनल काम है, वह 4 बजे के बाद करना। 10 तारीख को मीटिंग भी है। उसमें रहने का।
नसीमुद्दीन : ठीक है बहनजी।
'मुझे अपनी रिपोर्ट भी दो'
मायावती : और फिर अपना प्रोग्राम बनाओ। और फिर मुझे अपनी रिपोर्ट भी दो।
नसीमुद्दीन : ठीक है बहनजी, ठीक है बहनजी।
मायावती : और ये चारों मंडल के जिन-जिनको दिलवाए हैं। (एक शब्द सुनाई नहीं पड़ता)
आप वरिष्ठ आदमी थे...।
नसीमुद्दीन : नहीं बहनजी, मैं बात मान रहा हूं। लेकिन मैं इनको लेकर नहीं आया। पूछ लीजिए बहनजी।
मायावती : (झुंझलाते हुए) तो छोड़ो, अपनी जिम्मेदारी निभाओ।
नसीमुद्दीन : नहीं बहनजी, मैं उन्हें बुलवाता हूं। आपके सामने बात हो जाएगी, बहनजी।
मायावती : बात-वात नहीं। मैं किसी के माध्यम से नहीं, और खास तौर से जो मुस्लिम लोग हैं, उनकी टोटल जिम्मेदारी आपकी होगी।
नसीमुद्दीन : बहनजी जो आप कहेंगी, वह करेंगे बहनजी। लेकिन बहनजी मैंने नहीं करवाया।
मायावती : (गुस्साते हुए ) छोड़ो, नहीं भी करवाया तो भी जिम्मेवारी निभाओ।
नसीमुद्दीन : जी मैं तैयार हूं। बिल्कुल तैयार हूं।
मायावती : आप वरिष्ठ आदमी हैं। आपकी मर्जी के बिना मैंने किसी का टिकट फाइनल नहीं किया था, यह भी मानकर चलो। और मैंने मेंबरशिप की किताबें उनको दी थीं कि आप मेंबर बनाओ, कम में टिकट दूंगी। अब वह कम से कम मेरी किताबें तो दे दें, कटी हुई मेंबरशिप की।
नसीमुद्दीन : जी बहनजी। उनसे मुनकाद भाई ने बात की है। सब लोगों ने बात किया है।
टिकट फाइनल करने से पहले कही ये बातें
मायावती : चलो छोड़ो अभी, वो तो करेंगे। लेकिन उनको 9 तारीख की शाम को लेकर आओ। तब मैं यहां बात करती हूं, अच्छा। क्योंकि थोड़ा सा अपनी जिम्मेवारी को समझो। आप पार्टी के वरिष्ठ आदमी हैं। आप इतने साल से कई साल से उधर देखते रहे हैं। तो उन लोगों को असर नहीं होगा। आपके वरिष्ठ होने के नाते मैंने उनका टिकट फाइनल किया और उनको मेंबरशिप की किताबें दिलवाईं। चलो ये लोग भी उसी समाज से ताल्लुक रखते हैं। ये अपने समाज के लोगों को मेंबर बनाएं। तब टिकट फाइनल करूंगी। कहीं ऐसा न हो कि दलितों के वोट लेकर रह जाएं। तो क्या है कि आप इनसे बात करो। अपना हिसाब-किताब लेकर आएं। 9 तारीख की शाम 4 बजे आप उनको लेकर आएं। तब मैं उनसे बात करती हूं। अच्छा।
नसीमुद्दीन : (बीच-बीच में ) ठीक है बहनजी, ठीक है बहनजी।
मायावती : और आप भी अपने काम में तेजी लाओ। बहुत डिले हो रहा है। इस पर भी उसी दिन सुबह बात करती हूं।
नसीमुद्दीन : ठीक है बहनजी। (नसीमुद्दीन सिद्दीकी की ओर से जारी ऑडियो के आधार पर)
नसीमुद्दीन - मायावती की बातचीत क्लिपिंग 2
ऑपरेटर - जी, सर जय हिंद।
नसीमुद्दीन - हां भाई जय हिंद।
ऑपरेटर - सर बहनजी पूछ रही हैं कि वो लोग आए कि नहीं आए जिनको आना था।
नसीमुद्दीन - भैया बात करा दीजिए।
मायावती - हलो
नसीमुद्दीन - हां बहनजी, आदेश बहनजी।
मायावती - हां भैया वो आए नहीं।
नसीमुद्दीन - बहनजी वो कह रहे हैं कि आ रहे हैं, आ रहे हैं, मैं सोचा कि यदि वे आज जाएं तो लेकर आऊं।
मायावती - नहीं, चलो आप आ जाओ, आप तो आ जाओ।
नसीमुद्दीन - बहनजी आ जाने दीजिए फिर ज्यादा अच्छा रहता। फिर वो चले जाएंगे।
मायावती - पता नहीं कितने बजे आएंगे?
नसीमुद्दीन - बहनजी मजबूरी है।
मायावती - आपसे तो मुझे बात करनी है चलो आप आ जाओ।
नसीमुद्दीन - बहनजी मैं बहुत टॉर्चर हो चुका हूं। आपने, आनंद भैया ने और मिश्राजी ने बहुत टॉचर्र किया मुझे, बहनजी मैं डरता हूं आपसे।
नसीमुद्दीन - मायावती की बातचीत क्लिपिंग 3
ऑपरेटर - सर
नसीमुद्दीन - जी
ऑपरेटर - आप आ जाइए और बता दीजिए अपने घर कि जब वे लोग आ जाएं तो यहां भेज दें।
नसीमुद्दीन - भाई उनसे बात भी तो करनी है ना।
ऑपरेटर - जी जी बहनजी ने कहा कि आपको बुला लें।
नसीमुद्दीन - भाई, मुझे, काम तो उन्हीं के साथ है ना, मेरे अकेले आने का क्या मतलब। मैं लेकर आता हूं।
ऑपरेटर - बहिनजी ने कहा कि उनको बुला लेते हैं, फिर वो अपना आते रहेंगे
नसीमुद्दीन - भाई उनसे, बात भी तो करनी है उनसे, फोन पर सारी बात थोड़ी हो पाई है उनसे।
ऑपरेटर - साहब
नसीमुद्दीन - जी
ऑपरेटर - जब वो आएंगे तो हम बता देंगे अंदर, तो उनको साथ कर लीजिए आराम से।
नसीमुद्दीन - थोड़ा इंतजार कर लेने दीजिए मैं आता हूं।
ऑपरेटर - ठीक है।
नसीमुद्दीन - ओके
नसीमुद्दीन - मायावती की बातचीत क्लिपिंग 4
ऑपरेटर - सर
नसीमुद्दीन - जी भाई
ऑपरेटर - बहनजी बात करेंगी।
नसीमुद्दीन - दे दीजिए।
ऑपरेटर - दे रहे हैं।
नसीमुद्दीन - बहनजी आदेश, बहनजी आदेश।
मायावती - हां भाई जो आपको काम दे रखा है उसे थोड़ा जल्दी करो।
नसीमुद्दीन - बहनजी उसी में लगे हुए हैं। मैं बहनजी आपको नाराज नहीं देखना चाहता बहनजी।
मायावती - चलो ठीक है, अच्छी बात है। यह कर लोगे तो आगे बढ़ जाओगे।
नसीमुद्दीन - नहीं बहनजी, जो आपका आदेश है वह मुझे पालन करना है। बहनजी इसके आगे मैं क्या करूं?
मायावती - दूसरा क्या है वह लिख लो थोड़ा सा।
नसीमुद्दीन - जी बहनजी।
मायावती - सिवालखास जो विधानसभा की सीट थी, जिसको आपने मेंबरशिप की किताबें दिलाई थीं, उसका हिसाब नहीं हुआ है उससे बात करो।
नसीमुद्दीन - मैं बात करता हूं बहनजी।
मायावती - दूसरा क्या है एक मोदीनगर वाला है जिसको आपने टिकट दिलाया था, मेरे ख्याल में।
नसीमुद्दीन - सिवालखास, मोदीनगर।
मायावती - एक लोनीवाला है।
मायावती - दूसरा क्या है एक तो वह बहुत ज्यादा इधर-उधर कर रहा है अमरपाल शर्मा वाली सीट वाला जो है।
नसीमुद्दीन - जलालुद्दीन?
मायावती - हां।
नसीमुद्दीन - जी बहनजी उससे बात तो हुई थी।
अंतिम क्लिप में ये हुई बातें
मायावती - आपकी जिम्मेवारी बनती है, आपने अपनी जिम्मेवारी पर दिलवाई थीं उसको किताबें।
नसीमुद्दीन - नहीं बहनजी मैं उनसे कहता हूं, बुलाता हूं।
मायावती - उसको बोलो वो जो सिवालखास वाला है, मोदीनगर वाला है और जो मुस्लिम है।
नसीमुद्दीन - मैं बोलता हूं बहनजी, अब जरा तो काम निपट जाए तो मैं चला भी जाऊंगा।
मायावती - लोनीवाला है, अमरपाल शर्मा वाला है ये ठीक नहीं है अब ये आनाकानी कर रहे हैं मतलब।
नसीमुद्दीन - बहनजी मैं चला भी जाऊंगा जरा इधर वो हो जाए। अब बहनजी मैं आपको नाराज नहीं देखना चाहता मैं बहनजी, आपके आदेश के तहत काम करूंगा।
मायावती - नहीं नाराज क्या, ये तो आपके लिए भी जरूी है न।
नसीमुद्दीन - बहनजी मैं कह रहा हूं न मैं बिल्कुल जाऊंगा, जरा यहां पर वो हो जाए। और बहनजी जो आपका आदेश है मैं एक-एक प्रॉपर्टी बेचकर बहनजी आपको सौंप दूंगा।
मायावती - नहीं इसका क्या है यह तो आपके लिए भी जरूरी है न।
नसीमुद्दीन - बहनजी मैं आपका आदेश जानता हूं बहनजी, मैं किसी को नहीं जानता। मैं आपका आदेश...।
अपनी सम्पत्ति बेंचकर सब अलग कर दूंगा
मायावती - चलो ठीक है, इसको थोड़ा जल्दी करा लेना।
नसीमुद्दीन - जी बहनजी, इधर से निपट कर मैं एक दिन के लिए चला जाता हूं वहां गाजियाबाद, वो दो जिम्मेदारी है उनसे भी कराता हूं।
मायावती -हूं।
नसीमुद्दीन - बहनजी एक-एक आपके दिए हैं, मैंने बच्चों से, परिवार से ज्यादा आपको माना है।
मायावती - आपको बताया है कि उम्मीद बहुत बड़ी चीज होती है।
नसीमुद्दीन - जी बहनजी, तो बहनजी आपने कहा मैं लगा हुआ हूं चल-अचल संपत्ति बेचकर सब अलग कर दूंगा आपको दूंगा, जी बहनजी, जय हिंद।