अखिलेश ने मोदी के दावों पर उठाए सवाल तो मायावती ने कहा- लॉकडाउन में दलितों व गरीबों की उपेक्षा हुई
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देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए 3 मई तक के लिए लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है। इसकी घोषणा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित कर की है।
हालांकि, संबोधन के दौरान किए गए दावों को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'दावा है कि जब कोरोना के केस नहीं थे तब ही विभिन्न एअरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी गयी थी लेकिन सवाल ये है कि वो कितनी गंभीर और सार्थक रही। अगर ये सच है तो फिर ये बताया जाए कि कोरोना हमारे देश में पहले पहल कैसे आया।'
दावा है कि जब कोरोना के केस नहीं थे तब ही विभिन्न एअरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी गयी थी लेकिन सवाल ये है कि वो कितनी गंभीर और सार्थक रही. अगर ये सच है तो फिर ये बताया जाए कि कोरोना हमारे देश में पहले पहल कैसे आया.
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जब सार्थक काम होंगे, तब ही सच में देश का भला होगा.— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) April 14, 2020
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि जब देश में कोरोना के केस नहीं थे तभी देश के हवाईअड्डों पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई थी, जिस पर अखिलेश ने सवाल उठाए।
वहीं, मायावती ने मंगलवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्घांजलि देने के बाद कहा कि लॉकडाउन के दौरान देश के अन्य राज्यों की सरकारों ने दलितों व गरीबों की उपेक्षा की है। जिसके कारण उन्हें मजबूरन अपने घरों की ओर लौटना पड़ा है। हालांकि, इसके पहले उन्होंने ट्वीट कर राज्य सरकारों व राजनीतिक दलों से सियासत से ऊपर उठकर कोरोना को हराने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने की अपील की थी।