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Lucknow News: मामा ने लिवर दान कर बचाई नन्ही वाजिहा की जिंदगी

Tue, 07 Jul 2026 02:37 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 02:37 AM IST
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Maternal uncle saves little Wajiha's life by donating liver.
परिवार के साथ वाजिहा।
लखनऊ। रिश्ते सिर्फ खून से ही नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण से भी मजबूत होते हैं। लखनऊ की तीन साल की वाजिहा अब्बास की जिंदगी तब नई उम्मीद से भर गई, जब उसके 25 वर्षीय मामा हैदर कासिम रजा ने अपना लीवर दानकर उसे नया जीवन दे दिया।
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वाजिहा जन्मजात बिलियरी एट्रीशिया बीमारी से पीड़ित थी। उसके लीवर में पित्त नलिका (बाइल डक्ट) विकसित नहीं हुई थी, जिससे उसका लिवर लगातार खराब होता गया। जन्म के करीब 90 दिन बाद राजधानी के एक बड़े अस्पताल में उसकी सर्जरी हुई, लेकिन राहत नहीं मिली। बाद में गुरुग्राम के विशेषज्ञों ने जांच के बाद बताया कि बच्ची को बचाने का एकमात्र रास्ता लीवर ट्रांसप्लांट है। इलाज-अस्पतालों की दाैड़ में तीन साल गुजर गए।
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इधर दिन-ब-दिन उसकी तबीयत बिगड़ती जा रही थी। उसने खाना-पीना छोड़ दिया। वाजिहा का हीमोग्लोबिन स्तर तीन रह गया। पीलिया का स्तर 15 यानी खतरे के निशान से काफी ऊपर चला गया। मां जनीरा अब्बास और पिता अजहर अब्बास बेटी की हालत पर घबराए। उसे चेन्नई के एक बड़े अस्पताल में ले गए।
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बच्ची के माता-पिता नहीं बन सके डोनर

परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपयुक्त लिवर डोनर की थी। बच्ची की मां जनीरा का हाल ही में सिजेरियन हुआ था। यही नहीं, वह पित्त की थैली में पथरी और हार्निया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं, इसलिए वह लिवर दान नहीं कर सकती थीं। पिता अजहर अब्बास फैटी लिवर और अन्य चिकित्सीय जटिलताओं के कारण डोनर बनने के योग्य नहीं थे।

लंदन से दौड़े आए मामा, लिया बड़ा फैसला
ऐसे कठिन समय में वाजिहा के नाना-नानी साथ खड़े हुए। 25 वर्षीय मामा हैदर कासिम रजा आगे आए। लंदन में प्रबंधन की पढ़ाई कर रहे हैदर चेन्नई पहुंचे और भांजी को लिवर दान करने का फैसला लिया।

12 घंटे चला ऑपरेशन, अब दोनों स्वस्थ

चेन्नई के डॉ. रेला इंस्टीट्यूट में 13 मई को करीब 10 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 12 घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद सफल लिवर ट्रांसप्लांट किया। अब वाजिहा और उसके मामा दोनों स्वस्थ हैं।


जानें, क्या होता है बिलियरी एट्रीशिया
बिलियरी एट्रीशिया शिशुओं में होने वाला दुर्लभ, लेकिन गंभीर लिवर रोग है। इसमें लिवर के अंदर और बाहर की पित्त नलिकाएं जन्म के समय या तुरंत बाद अवरुद्ध या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे पित्त आंतों में नहीं पहुंच पाता और लिवर में जमा होकर उसे नुकसान पहुंचाता है।

परिवार के साथ वाजिहा।

परिवार के साथ वाजिहा।

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