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यूपी में अब जरूरी होगा विवाह पंजीकरण कराना

Sat, 25 Jul 2015 02:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 25 Jul 2015 02:39 AM IST
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Marriage ragistration to be tabled in cabinet.

प्रदेश में विवाह पंजीकरण को अनिवार्य करने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार द्वारा गठित मंत्रिमंडलीय समिति ने भी इस प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी है। समिति ने कुछ सिफारिशों के साथ अपनी रिपोर्ट महिला कल्याण विभाग को सौंप दी है। अब शीघ्र ही यह प्रस्ताव कैबिनेट में रखा जाएगा।

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वहां से अनुमोदन के बाद प्रदेश में इसे अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा। सरकार विवाह पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन भी स्वीकार करेगी।

विवाह पंजीकरण देश में कई राज्यों खासकर राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, केरल व बिहार में अनिवार्य है। इन राज्यों में पंजीकरण न कराने वालों से जुर्माना भी वसूला जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश व तेलंगाना ऐसे राज्य हैं जहां यह व्यवस्था अभी तक लागू नहीं है। तेलंगाना नया राज्य है। जबकि यूपी में विवाह पंजीकरण में सबसे ज्यादा दिक्कत मुसलिम समुदाय को हो रही है।
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पहले जो प्रस्ताव तैयार किया गया था उसमें विवाह पंजीकरण न कराने वालों को दंडित करने का प्रावधान था। विवाह पंजीकरण कराना मुसलिम समुदाय के गले के नीचे नहीं उतर रहा है। वे इसे शरीयत कानून में सीधी घुसपैठ मानते हैं। मुस्लिम धर्म गुरुओं का मानना है कि शरीयत कोर्ट ही निकाह को वैध व अवैध करार दे सकती है।
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ये होगा विवाह पंजीकरण से लाभ

Marriage ragistration to be tabled in cabinet.

इन्हीं सब को देखते हुए प्रदेश सरकार ने महिला कल्याण विभाग के इस प्रस्ताव को पास करने के बजाए इसमें एक मंत्रिमंडलीय उप समिति बना दी थी।

सरकार के वरिष्ठ मंत्री अहमद हसन के अलावा पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अंबिका चौधरी व महिला कल्याण मंत्री अरुण कुमारी कोरी इसमें शामिल थीं। अब इस समिति ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। इसमें कहा गया है कि विवाह पंजीकरण न कराने वालों को दंडित करने के बजाय उन्हें सरकारी सेवाओं में लाभ न देने की बात कही गई है।

समिति ने भी माना कि विवाह पंजीकरण की अनिवार्यता किसी भी धर्म विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। बल्कि इसका मूल उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना है।

विवाह पंजीकरण के बाद महिलाओं को यदि उनके पति छोड़ते हैं तो उन्हें ससुराल की संपत्ति में भी अधिकार मिलता है।

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