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जब जमीन पर उतरे प्रोजेक्ट तो विवादों ने लगाया ब्रेक
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शहर के विकास से जुड़े दो प्रमुख प्रोजेक्ट सरकारी झंझट के कारण ही ठप हो गए हैं। हैवतमऊ मवैया झील के सौंदर्यीकरण और मानसरोवर योजना में श्मशान के सौंदर्यीकरण के करोड़ों की लागत वाले प्रोजेक्टों पर अड़ंगा भी तब लगा जब जमीन पर इनका काम शुरू हो गया। इससे पहले प्रोजेक्ट बनने से लेकर मंजूरी तक कोई बाधा नहीं आई।
रायबरेली रोड स्थित हैवतमऊ मवैया झील के सौंदर्यीकरण और झील के पानी को शोधित करने के लिए केंद्र सरकार की अमृत योजना से 20.62 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट पास हुआ है। इसपर काम शुरू हुआ तो सरोजनीनगर तहसील ने यह कहते हुए अड़ंगा लगा दिया कि झील की जमीन पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। इसके बाद करीब तीन महीने से झील के सौंदर्यीकरण का काम ठप है। फिलहाल इसके शुरू होने के भी आसार नजर नहीं आ रहे। यह प्रोजेक्ट पूरा होने से इस इलाके की कई लाख की आबादी को सीवर की समस्या से राहत मिलनी है, सौंदर्यीकरण से इलाके के लिए एक अच्छा मनोरंजन स्थल भी तैयार होना है। मगर काम अटकने से सब पर ब्रेक लग गया है।
सात महीन से ठप है श्मशान सौंदर्यीक रण का काम
राजाबिजली द्वितीय वार्ड की पार्षद राजवती ने बताया कि वार्ड केबेहसा गांव में 100 साल से अधिक पुराना श्मशान स्थल है। वहां पर श्मशान का शेड और पक्की कब्रें भी बनी हैं। यहां पर एक तालाब भी है। बीते साल क्षेत्र के दौरे पर आए मंत्री सुरेश खन्ना ने श्मशान और तालाब सौंदर्यीकरण के लिए 1.50 करोड़ का प्रोजेक्ट स्थानीय लोगों की मांग पर मंजूर किया था। इस साल 23 जनवरी को काम शुरू हुआ और उसके दो दिन बाद ही कुछ प्रभावशाली लोगों ने यह कहकर विवाद कर दिया गया है कि वहां पर एलडीए के प्लाट हैं और काम भी रुकवा दिया। जिससे नाराज सैकड़ों स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। सांसद कौशल किशोर ने एलडीए अधिकारियों से जवाब तलब भी किया। उसके बाद भी यह काम अटका है।
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हैवतमऊ मवैया झील पैमाइश की अभी फाइनल रिपोर्ट नहीं आ पाई है। इस कारण झील सौंदर्यीकरण का काम रुका हुआ है। बेहसा श्मशान स्थल सौंदर्यीकरण में जमीन को लेकर स्थिति साफ करने को एलडीए को पत्र भेजा गया है। मगर वहां से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। इस कारण काम रुका है। एलडीए श्मशान की जमीन को अब ग्रुप हाउसिंग बता रहा है, जबकि गांव वाले कहते हैं कि वह पुराना श्मशान है।
- एससी सिंह, नगर अभियंता नगर निगम
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रायबरेली रोड स्थित हैवतमऊ मवैया झील के सौंदर्यीकरण और झील के पानी को शोधित करने के लिए केंद्र सरकार की अमृत योजना से 20.62 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट पास हुआ है। इसपर काम शुरू हुआ तो सरोजनीनगर तहसील ने यह कहते हुए अड़ंगा लगा दिया कि झील की जमीन पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। इसके बाद करीब तीन महीने से झील के सौंदर्यीकरण का काम ठप है। फिलहाल इसके शुरू होने के भी आसार नजर नहीं आ रहे। यह प्रोजेक्ट पूरा होने से इस इलाके की कई लाख की आबादी को सीवर की समस्या से राहत मिलनी है, सौंदर्यीकरण से इलाके के लिए एक अच्छा मनोरंजन स्थल भी तैयार होना है। मगर काम अटकने से सब पर ब्रेक लग गया है।
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सात महीन से ठप है श्मशान सौंदर्यीक रण का काम
राजाबिजली द्वितीय वार्ड की पार्षद राजवती ने बताया कि वार्ड केबेहसा गांव में 100 साल से अधिक पुराना श्मशान स्थल है। वहां पर श्मशान का शेड और पक्की कब्रें भी बनी हैं। यहां पर एक तालाब भी है। बीते साल क्षेत्र के दौरे पर आए मंत्री सुरेश खन्ना ने श्मशान और तालाब सौंदर्यीकरण के लिए 1.50 करोड़ का प्रोजेक्ट स्थानीय लोगों की मांग पर मंजूर किया था। इस साल 23 जनवरी को काम शुरू हुआ और उसके दो दिन बाद ही कुछ प्रभावशाली लोगों ने यह कहकर विवाद कर दिया गया है कि वहां पर एलडीए के प्लाट हैं और काम भी रुकवा दिया। जिससे नाराज सैकड़ों स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। सांसद कौशल किशोर ने एलडीए अधिकारियों से जवाब तलब भी किया। उसके बाद भी यह काम अटका है।
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हैवतमऊ मवैया झील पैमाइश की अभी फाइनल रिपोर्ट नहीं आ पाई है। इस कारण झील सौंदर्यीकरण का काम रुका हुआ है। बेहसा श्मशान स्थल सौंदर्यीकरण में जमीन को लेकर स्थिति साफ करने को एलडीए को पत्र भेजा गया है। मगर वहां से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। इस कारण काम रुका है। एलडीए श्मशान की जमीन को अब ग्रुप हाउसिंग बता रहा है, जबकि गांव वाले कहते हैं कि वह पुराना श्मशान है।
- एससी सिंह, नगर अभियंता नगर निगम