'भ्रष्ट' यादव के बाद इन सफेदपोशों पर गिरेगी गाज!
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यादव सिंह का प्रकरण एसआईटी की जांच के दायरे आने से मायाराज के कई प्रभावशाली नेता व नोएडा प्राधिकरण के चार से अधिक अफसरों की भी जांच होनी तय है।
काले धन पर बनी एसआईटी द्वारा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड(सीबीडीटी) से यादव सिंह से संबंधित दस्तावेजों को प्रवर्तन निदेशालय के साथ साझा करे जाने को कहे जाने के बाद से ही यह स्पष्ट हो गया है कि अब इस मामले में किसी तरह की लीपापोती की संभावना किसी हद तक समाप्त हो गई है।
हालांकि, केंद्रीय एजेंसियों द्वारा मामले की जांच को अपने हाथ में ले लिए जाने के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं, लेकिन इतना तय है कि यादव सिंह के साथ उसके कारनामों में शामिल या उसकी तरह आंख मूंद कर रखने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी।
अधिकारियों को इसमें अपनी भूमिका के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा, जिसमें उनकी बचत हाल-फिलहाल संभव नहीं प्रतीत हो रही है। जांच एजेंसियों के सूत्र बताते हैं कि यादव सिंह के कार्यकाल के दौरान नोएडा विकास प्राधिकरण के उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच के निर्देश हैं।
कॉल डिटेल्स की भी हो रही जांच
किस अधिकारी की इस सारी अनियमितता में क्या भूमिका रही। अनियमितता के दौरान कौन-कौन अधिकारी तैनात रहे। किसके यादव सिंह से कैसे रिश्ते थे। किसके साथ लेन-देन थी, यह सभी जांचा जा रहा है।
इसके लिए जांच एजेंसियां यादव सिंह के फोन के कॉल डिटेल्स भी पता कर रही है। इसके साथ ही यादव सिंह की डायरी में दर्ज नामों का भी मिलान किया जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि तत्कालीन सरकार के दौरान दिल्ली में रहकर नोएडा व एनसीआर के मामलों में दखल रखने वाले बसपा सरकार के वरिष्ठ नेताओं के नजदीकी रिश्तेदारों की भूमिका को भी खंगाला जा रहा है।
ईडी के सूत्रों की मानें तो आयकर विभाग की एसेसमेंट रिपोर्ट मिलने से पहले ही अभी तक की पड़ताल में सामने आए तथ्य ही इतने काफी हो चुके हैं कि जांच एजेंसी यादव सिंह के खिलाफ जल्द ही मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज कर सकती है। इसके लिए ईडी की एक टीम अभी तक हासिल दस्तावेजों व तथ्यों का अध्ययन करने में जुट गई है।