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तबादले के बाद भी कई लिपिकों ने नहीं संभाला कार्यभार
Wed, 18 Nov 2020 07:33 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 18 Nov 2020 07:33 PM IST
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- फोटो : Getty
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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस) निदेशालय में वर्षों से जमे तमाम बाबुओं का चार महीने पहले ही तबादला जिलों में कर दिया गया था, लेकिन एक दर्जन से अधिक बाबुओं ने अभी तक नई तैनाती वाले स्थान पर न जाकर मुख्यालय का ही चक्कर लगा रहे हैं। कई लिपिक तो नियमित तौर पर मुख्यालय पहुंचकर अप्रत्यक्ष तौर पर गोपनीय व महत्वपूर्ण फाइलों का निस्तारण भी कर रहे हैं। कई लोग तो तबादले के खिलाफ कोर्ट में चुनौती दे रखा है और इसी आधार पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है।
बता दें कि आईसीडीएस मुख्यालय में प्रधान सहायकों के स्वीकृत 8 पदों के विपरीत 60 प्रधान सहायक 20-25 वर्षों से जमे थे। लंबे समय से तैनाती की वजह से कतिपय लिपिकों का एक काकस बन गया था, जिसे अब तक कोई भी नहीं तोड़ पाया था। कार्यभार संभालने के बाद से ही अपर मुख्य सचिव एस. राधा चौहान ने बाबुओं को काकस को तोड़ने के लिए जून में 15 और अगस्त में 19 बाबुओं का एक साथ तबादला जिलों में परियोजनाओं पर कर दिया था।
इसके बावजूद काकस में शामिल रहे करीब एक दर्जन बाबुओं ने नये तैनाती स्थल पर जाने के बजाए तबादला आदेश को कोर्ट में चुनौती दे रखा है। सूत्रों के मुताबिक तैनाती वाले जिलों में कार्यभार ग्रहण न करने वाले कई लिपिक तो नियमित तौर पर आईसीडीएस मुख्यालय भी आते हैं और अपने पुराने पटल की फाइलों का निस्तारण भी करते हैं। उधर कोर्ट के आदेश के आधार पर शासन व निदेशालय स्तर से इन लिपिकों पर कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है। उधर, आईसीडीएस निदेशक डॉ. सारिका मोहन का कहना है कि तबादला आदेश के खिलाफ कई लोग कोर्ट चले गए हैं। इसलिए उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। कोर्ट के आदेश का निस्तारण होने के बाद ही कार्रवाई होगी।
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बता दें कि आईसीडीएस मुख्यालय में प्रधान सहायकों के स्वीकृत 8 पदों के विपरीत 60 प्रधान सहायक 20-25 वर्षों से जमे थे। लंबे समय से तैनाती की वजह से कतिपय लिपिकों का एक काकस बन गया था, जिसे अब तक कोई भी नहीं तोड़ पाया था। कार्यभार संभालने के बाद से ही अपर मुख्य सचिव एस. राधा चौहान ने बाबुओं को काकस को तोड़ने के लिए जून में 15 और अगस्त में 19 बाबुओं का एक साथ तबादला जिलों में परियोजनाओं पर कर दिया था।
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इसके बावजूद काकस में शामिल रहे करीब एक दर्जन बाबुओं ने नये तैनाती स्थल पर जाने के बजाए तबादला आदेश को कोर्ट में चुनौती दे रखा है। सूत्रों के मुताबिक तैनाती वाले जिलों में कार्यभार ग्रहण न करने वाले कई लिपिक तो नियमित तौर पर आईसीडीएस मुख्यालय भी आते हैं और अपने पुराने पटल की फाइलों का निस्तारण भी करते हैं। उधर कोर्ट के आदेश के आधार पर शासन व निदेशालय स्तर से इन लिपिकों पर कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है। उधर, आईसीडीएस निदेशक डॉ. सारिका मोहन का कहना है कि तबादला आदेश के खिलाफ कई लोग कोर्ट चले गए हैं। इसलिए उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। कोर्ट के आदेश का निस्तारण होने के बाद ही कार्रवाई होगी।
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इन लिपिकों ने नहीं किया कार्यभार ग्रहण
- सुषमा बहुगुणा- बदायूं
- योगेन्द्र यादव- सोनभद्र
- अजय बाजपेयी- बलरामपुर
- हरि बाबू- बस्ती
- उपेन्द्र श्रीवास्तव- लखनऊ (जिला)
- शारिब खान- सीतापुर
- विशाल श्रीवास्तव- सीतापुर
- बजरंगबली पांडेय- बाराबंकी
- लालबिहारी- गोंडा
- योगेन्द्र यादव- सोनभद्र
- अजय बाजपेयी- बलरामपुर
- हरि बाबू- बस्ती
- उपेन्द्र श्रीवास्तव- लखनऊ (जिला)
- शारिब खान- सीतापुर
- विशाल श्रीवास्तव- सीतापुर
- बजरंगबली पांडेय- बाराबंकी
- लालबिहारी- गोंडा