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मानसून गया लेकिन नहीं आई राहत
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Wed, 06 Nov 2013 12:05 AM IST
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मानसून की बरसात में बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र से मांगी गई सहायता केंद्रीय टीम की आने के बाद ही फाइनल हो पाएगी।
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केंद्र से 3210 करोड़ रुपये की मांग करने के बाद प्रदेश सरकार को केंद्रीय टीम के आने का इंतजार है।
राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रदेश सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए व्यक्तिगत राहत व इन्फ्रास्ट्रक्चर पुनर्निर्माण को लेकर 3210 करोड़ रुपये की मांग की है।
मगर यह सहायता कितनी मिलेगी यह केंद्रीय टीम की रिपोर्ट पर तय होगा।
अधिकारी के अनुसार प्रदेश से मांग का ज्ञापन पाने के बाद केंद्र विभिन्न विभागों के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम गठित करता है।
इसमें कृषि, सिंचाई, सड़क, राजस्व जैसे विभागों के अधिकारी शामिल होते हैं। जिन जिलों के लिए राहत मांगी जाती है केंद्रीय टीम उनमें से कुछ जिलों का चयन कर वहां हुए नुकसान का स्थलीय जायजा लेती है।
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फिर राज्य की मांग का अपने हिसाब से आकलन करते हुए केंद्र को रिपोर्ट देती है और उसके अनुसार धन के आवंटन की सिफारिश करती है।
प्रदेश सरकार को अब टीम के आने का इंतजार है। अधिकारी के अनुसार प्रदेश से सहयता की मांग के बाद केंद्रीय टीम आने में करीब एक से डेढ़ महीने का वक्त लगता है। ऐसे में केंद्रीय टीम के दिसंबर में आने की संभावना है।
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कृषि के नुकसान का नहीं लगा पाएगी अंदाजा
जानकार बताते हैं कि प्रदेश की ओर से केंद्र को नुकसान की भरपाई की मांग से जुड़ा ज्ञापन भेजने और फिर वहां से केंद्रीय टीम के आने में इतना वक्त लग जाता है कि केंद्रीय टीम के आने का मकसद अधूरा रह जाता है।
वजह टीम आने तक बरसात खत्म हुए करीब दो महीने बीत चुके होते हैं। तब तक किसानों की फसल उठ चुकी होती है।
किसान के नुकसान का आकलन केंद्रीय टीम नहीं कर सकती। उसे प्रदेश की रिपोर्ट पर ही भरोसा करना पड़ेगा। हालांकि, वह इन्फ्रास्ट्रक्चर नुकसान का अंदाजा लगा सकती है।