{"_id":"5bb6eefc867a5528dc2e0880","slug":"manoj-rupda-will-be-honoured-with-kathakram-samman","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिछड़ों का दर्द शब्दों में पिरोने वाले मनोज रूपड़ा को कथाक्रम सम्मान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिछड़ों का दर्द शब्दों में पिरोने वाले मनोज रूपड़ा को कथाक्रम सम्मान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 05 Oct 2018 10:26 AM IST
विज्ञापन
मनोज रूपड़ा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
समाज की पीड़ा शब्दों में उतारने वाले लेखक व कथाकार नागपुर के मनोज रूपड़ा को इस बार का आनंद सागर स्मृति कथाक्रम सम्मान दिया जाएगा। 18 नवंबर को राजधानी में होने वाले कथाक्रम में उन्हें 15 हजार रुपये धनराशि, सम्मान चिह्न व पत्रक से नवाजा जाएगा।
कथाक्रम संयोजक शैलेंद्र सागर ने बताया कि कथाक्रम सम्मान समिति ने मनोज को यह सम्मान दिए जाने पर सहमति बनाई। समिति में शैलेंद्र के अलावा वरिष्ठ कहानीकार शिवमूर्ति, लेखिका रजनी गुप्त, रंगकर्मी राकेश शामिल रहे। सम्मान 18 नवंबर को लखनऊ में होने वाले कथाक्रम के तहत होगा।
दिसंबर 1963 को जन्मे मनोज रुपड़ा हिंदी के कथाकार हैं। वह तीन दशकों से भी अधिक समय से आर्थिक रूप से कमजोर व पिछड़े लोगों के स्वप्न, संघर्ष और पीड़ा को अपने लेखन में पिरोते आए हैं। उनके तीन कहानी संग्रह दफन और अन्य कहानियां, साज-नासाज, व टावर ऑफ लाइसेंस के साथ ही दो उपन्यास प्रति संसार और काले उपाध्याय प्रकाशित हो चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
कथाक्रम संयोजक शैलेंद्र सागर ने बताया कि कथाक्रम सम्मान समिति ने मनोज को यह सम्मान दिए जाने पर सहमति बनाई। समिति में शैलेंद्र के अलावा वरिष्ठ कहानीकार शिवमूर्ति, लेखिका रजनी गुप्त, रंगकर्मी राकेश शामिल रहे। सम्मान 18 नवंबर को लखनऊ में होने वाले कथाक्रम के तहत होगा।
विज्ञापन
दिसंबर 1963 को जन्मे मनोज रुपड़ा हिंदी के कथाकार हैं। वह तीन दशकों से भी अधिक समय से आर्थिक रूप से कमजोर व पिछड़े लोगों के स्वप्न, संघर्ष और पीड़ा को अपने लेखन में पिरोते आए हैं। उनके तीन कहानी संग्रह दफन और अन्य कहानियां, साज-नासाज, व टावर ऑफ लाइसेंस के साथ ही दो उपन्यास प्रति संसार और काले उपाध्याय प्रकाशित हो चुके हैं।
विज्ञापन