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मनमोहन सिंह: कभी नहीं तोड़ा एसपीसी का सुरक्षा घेरा, बीएमडब्लू के पीछे हमेशा खड़ी रहती थी मारुति 800
Sat, 28 Dec 2024 08:06 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sat, 28 Dec 2024 08:06 AM IST
सार
Manmohan Singh: पूर्व पीएम की मनमोहन सिंह की मृत्यु के बाद उनके साथ एसपीजी रहे और वर्तमान में योगी सरकार के मंत्री असीम अरुण ने उनसे जुड़े किस्से शेयर किए।
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मनमोहन सिंह के किस्से।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के बाद समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने उनके साथ एसपीजी के अपने अनुभवों को सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें उन्होंने पूर्व पीएम की सादगी का जिक्र किया। उन्होंने पूर्व पीएम से आम आदमी की तरह रहने, मुश्किल वक्त में शांत रहने, विरोधियों को भी अपने पक्ष में करने जैसे तमाम सबक सीखे। इसने आगे पुलिस की नौकरी में उनकी खासी मदद की।
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बता दें कि आईपीएस रहने के दौरान असीम अरुण स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) का हिस्सा थे। उन्होंने करीब तीन वर्ष तक पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह की सुरक्षा का जिम्मा संभाला था। असीम अरुण ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''मैं 2004 से लगभग तीन साल उनका बॉडीगार्ड रहा। एसपीजी में पीएम की सुरक्षा का सबसे अंदरूनी घेरा होता है - क्लोज प्रोटेक्शन टीम। जिसका नेतृत्व करने का अवसर मुझे मिला था। एआईजी सीपीटी वो व्यक्ति है, जो पीएम से कभी भी दूर नहीं रह सकता। यदि एक ही बॉडीगार्ड रह सकता है तो साथ यह बंदा होगा। ऐसे में उनके साथ उनकी परछाई की तरह साथ रहने की जिम्मेदारी मेरी
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डॉ. साहब की अपनी एक ही कार थी मारुति 800, जो पीएम हाउस में चमचमाती काली बीएमडब्ल्यू के पीछे खड़ी रहती थी। वह बार-बार मुझे कहते, असीम मुझे इस कार में चलना पसंद नहीं है। मेरी गड्डी तो यह है (मारुति)। मैं समझाता कि सर यह गाड़ी आपके ऐश्वर्य के लिए नहीं है, इसके सिक्योरिटी फीचर्स ऐसे हैं, जिसके लिए एसपीजी ने इसे लिया है। लेकिन जब कारकेड मारुति के सामने से निकलता तो वे हमेशा मन भर उसे देखते। जैसे संकल्प दोहरा रहे हो कि मैं मिडिल क्लास व्यक्ति हूं और आम आदमी की चिंता करना मेरा काम है। करोड़ों की गाड़ी पीएम की है, मेरी तो यह मारुति है। कुछ दिन बाद फिर से बीएमडब्ल्यू हटाकर अपनी मारुति या एंबेसडर से जाने की जिद करने लगे थे।''
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कभी नहीं तोड़ा सुरक्षा घेरा
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह
- फोटो : अमर उजाला
असीम अरुण ने बताया कि डॉ. मनमोहन सिंह सबसे मिलते थे। उन्होंने कभी एसपीजी का सुरक्षा घेरा तोड़ने का प्रयास नहीं किया, जैसा कि अक्सर तमाम नेता करते हैं। इससे एसपीजी को कभी असहज स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। उन्हें अहसास था कि एसपीजी उनकी सुरक्षा के लिए है, जिसके नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।
व्यस्तता के बावजूद करते थे अध्ययन
उन्होंने बताया कि पीएम होने के बाद भी वह रोजाना आर्थिक मामलों का लगातार अध्ययन करते थे। रोजाना रात में डेढ़ घंटा अध्ययन में व्यतीत होता था। उनका टाइम मैनेजमेंट इतना अच्छा था कि किसी भी जगह जाने के तय शेड्यूल से 15 मिनट पहले वह तैयार रहते थे। सरकारी फाइलों का पढ़ने का भी तय समय था। विदेश जाने पर भी उनका पुराना खानसामा साथ जाता था, जो उनके लिए सादा शाकाहारी भोजन बनाता था।
व्यस्तता के बावजूद करते थे अध्ययन
उन्होंने बताया कि पीएम होने के बाद भी वह रोजाना आर्थिक मामलों का लगातार अध्ययन करते थे। रोजाना रात में डेढ़ घंटा अध्ययन में व्यतीत होता था। उनका टाइम मैनेजमेंट इतना अच्छा था कि किसी भी जगह जाने के तय शेड्यूल से 15 मिनट पहले वह तैयार रहते थे। सरकारी फाइलों का पढ़ने का भी तय समय था। विदेश जाने पर भी उनका पुराना खानसामा साथ जाता था, जो उनके लिए सादा शाकाहारी भोजन बनाता था।