एक साल बाद ‘जिंदा हुआ’, कार में जला मिला पोस्टमास्टर, सीरियल से कम नहीं ये कहानी
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मौत की फर्जी कहानी गढ़ने वाले पोस्टमास्टर के परिवार के नंबर सर्विलांस पर लगाकर सालभर इस राज का खुलासा हो सका।
बताते हैं कि 65 लाख का बीमा का धन हड़पने के लिए उसने खुद को जिंदा जलाने साजिश रची थी। गुरूवार को जिला पुलिस टीम झारखंड से हरिशकंर को लाने के रवाना हुई है। इसी के साथ सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर गाड़ी में मिला जला हुआ कंकाल किसका था?
ऐसे मिला था जली कार में पोस्टमास्टर का कंकाल
कार के नंबर से हुई जांच में नरकंकाल की पहचान नगर के उसरु स्थित शारदा कालोनी निवासी रेलवे स्टेशन के सामने स्थित पोस्टआफिस की मोदहा शाखा में बतौर पोस्टमास्तर तैनात हरिशंकर सिंह के रूप में थी।
कार कौन ड्राइव कर रहा था? कौन-कौन सवार थे? इसका कोई सुराग नहीं लगा था। पुलिस की जांच और मौका-ए-वारदात से हत्या कर शव जलाने की बात सामने आई थी।
पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के साथ गोली लगने की संभावना पर कंकाल का एक्सरे भी कराया लेकिन कोई क्लू नहीं मिला था। परिजनों की ओर से भी किसी से दुश्मनी नहीं बताई जा रही थी।
मूलरुप से जनपद के बीकापुर कोतवाली क्षेत्र के मलिकपुर निवासी 50 वर्षीय हरिशंकर सिंह पुत्र स्व. हरदेव सिंह ने नगर कोतवाली के उसरु स्थित शारदा नगर कालोनी में अपना आवास बनवा लिया था।
जहां परिवार के साथ रहते थे। वर्तमान में वह रेलवे स्टेशन के सामने स्थित पोस्ट आफिस की मोदहा शाखा में बतौर पोस्टमास्टर तैनात थे। वह 11 मई 2016 को परिजनों को लखनऊ जाने की बात कहकर गये थे। अगले दिन गुरुवार की सुबह कैंट पुलिस को हाइवे पर चंद्रावती डिग्री कालेज के पास स्थित पुलिया पर एक जलती हुई वैगनआर कार की जानकारी हुई तो पुलिस ने मौके पर पहुंच स्थानीय लोगों की मदद से आग बुझाई और पड़ताल की।
पड़ताल में जली हुई कार की सीटों के बीच एक अधेड़ का जला हुआ कंकाल मिलने पर हडकंप मच गया था। वाहन के पंजीकरण नंबर यूपी 46 एम 4778 की पड़ताल के बाद पता चला कि मृतक शारदा नगर कालोनी निवासी 50 वर्षीय हरिशंकर हैं।
उन्होंने वाहन गोंडा के तरबगंज थाना क्षेत्र निवासी देवेंद्र प्रताप सिंह से खरीदा था। परिवारीजनों के मुताबिक वाहन वह खुद ही चलाते थे। तब सवाल उठा था कि आखिर उनकी बाडी जली हुई कार के पिछले हिस्से में सीटों के बीच कैसे पहुंची? इतना ही नहीं महज आधे घंटे से कम समय में उनका शरीर जलकर कंकाल कैसे बन गया?
परिवारीजन इसको हादसा मानने को तैयार नहीं थे। 90 फीसदी जला होने के चलते पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कोई खास सुराग नहीं हासिल हो पाया था। पुलिस ने बिसरा प्रिजर्व कर जांच के लिए सुरक्षित रखवाया व डीएनए जांच के लिए सैंपल सुरक्षित कराया था।
पुलिस की जांच के मुताबिक पत्नी संगीता सिंह समेत परिजनों को पता चल गया था हरिशंकर जिंदा हैं। सर्विलांस की लंबी कोशिशों के बाद उनका झारखंड में सुराग मिला। एसपी सिटी उदयशंकर सिंह का कहना है कि हरिशंकर को लाने कैंट पुलिस की टीम भेजी गई है। हरिशंकर ने ये प्लान कैसे बनाया, ये लाश किसकी थी और उनके घरवालों का क्या रोल रहा, ये सब पता चलेगा उसके वापस आने पर।