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अधिकारियों की मर्जी से होता है यहां प्रमोशन
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 12 Apr 2014 09:59 AM IST
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शिक्षा विभाग में अपर निदेशक से निदेशक बनाने और संयुक्त निदेशक से अपर निदेशक पद पर पदोन्नति का ऐसा नियम है कि अधिकारी चाहें तो वरिष्ठता सूची में आठवें नंबर वाले को भी नंबर वन बना दें।
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यह चर्चा अनायास ही नहीं है, शिक्षा विभाग में आजकल कुछ ऐसी ही बातें अधिकारियों की जुबान पर है। शिक्षा विभाग में निदेशक और अपर निदेशक के पद पर पदोन्नति का मानक जो है उसमें सत्ता व शासन वाले यदि चाहें तो वरिष्ठताक्रम में आठवें नंबर वाले को भी पदोन्नति दे दें।
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बासुदेव यादव के रिटायर होने के बाद शिक्षा विभाग में निदेशक का एक पद खाली हुआ है। शिक्षा विभाग में निदेशक के कुल चार पद हैं।
मौजूदा समय तीन अधिकारी सर्वेंद्र विक्रम सिंह, अवध नरेश शर्मा और अमरनाथ वर्मा हैं। निदेशक के एक पद पर अपर निदेशक स्तर के अधिकारी को पदोन्नति देनी है। शिक्षा विभाग में 12 अपर निदेशक हैं।
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वरिष्ठताक्रम में दिनेश बाबू शर्मा और संजय सिन्हा पहले और दूसरे नंबर पर हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग की कार्यवाहक निदेशक शैल यादव सातवें और शासन में संयुक्त सचिव ममता श्रीवास्तव आठवें नंबर पर हैं।
शिक्षा विभाग में माध्यमिक व बेसिक शिक्षा निदेशक की दो सबसे महत्वपूर्ण कुर्सियां हैं। इसलिए विभाग के अपर निदेशक से निदेशक स्तर के हर अधिकारी की चाहत इस कुर्सी को पाने की होती है।
इसमें भी सर्वाधिक मारामारी माध्यमिक शिक्षा निदेशक के लिए होती है। बासुदेव यादव रिटायर हो चुके हैं। पहले तो अपना सेवा विस्तार चाहते थे, लेकिन ऐसा न होने पर वह चाहते हैं कि उनका कोई चाहने वाला ही इस कुर्सी पर बैठे।
इसलिए निदेशक पद के लिए होने वाली विभागीय पदोन्नति कमेटी की बैठक को लेकर जो चर्चाएं शुरू हुई हैं उसके पीछे बासुदेव यादव को ही माना जा रहा है