संभल विधानसभा सीट: सपा का विजय रथ रोकने के लिए अन्य दलों ने तैयार किया चक्रव्यूह
संभल विधानसभा से इकबाल महमूद चुनावी मैदान में हैं। उन्हें रोकने के लिए बसपा, कांग्रेस व भाजपा में मजबूत घेराबंदी की है।
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लगातार पांच बार से संभल का किला फतह कर रहे सपा विधायक और पूर्व मंत्री इकबाल महमूद का विजय रथ रोकने के लिए इस बार भाजपा, बसपा और कांग्रेस सहित अन्य दलों ने मजबूत घेरेबंदी की है। इससे मुकाबला कांटे का होने के आसार हैं। जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा, इस सवाल पर सियासी पंडितों का कहना है कि मुस्लिम मतदाताओं का रुझान और वोटों का बिखराव इस बार जीत-हार तय करेगा। पर, इतना तय है कि वोटों में सेंधमारी से सियासी समीकरण बदल सकते हैं।
मुस्लिम बहुल इस विधानसभा सीट पर भाजपा को छोड़कर अन्य सभी दल इसी वर्ग के प्रत्याशियों पर दांव लगाते आए हैं। पिछले 26 सालों में हुए विधानसभा के पांच चुनावों में सपा के इकबाल महमूद अन्य दलों के समीकरणों को ध्वस्त करते आ रहे हैं। हालांकि, भाजपा इस बार अन्य दलों के वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी में है। भाजपा अपने परंपरागत वोट बैंक के साथ-साथ दलित मतदाताओं को साधने की कोशिश मंे जुटी है। भाजपा ने इस सीट से इकबाल महमूद के मुकाबले में राजेश सिंघल को मैदान में उतारा है। बसपा ने शकील अहमद पर दांव लगाया है। श्ाकील पहली बार विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरे हैं। वे बसपा के परंपरागत वोट बैंक के साथ-साथ मुस्लिम मतदाताओं को साधने की कोशिश में लगे हैं। उनकी कोशिश कामयाब रही तो नतीजे बदल सकते हैं।
कांग्रेस ने पेशे से पत्रकार रहीं निदा अहमद को मैदान में उतारा है। निदा अहमद तुर्क बिरादरी की हैं और संभल विधानसभा क्षेत्र में तुर्क बिरादरी का वोट 70 हजार के करीब है। यदि निदा अहमद ने बिरादरी में पकड़ बनाई तो सपा के परंपरागत वोट में सेंध लग सकती है। साफ है कि जो दल परंपरागत वोट बैंक के साथ दूसरे के खेमे में जितना सेंध लगा लेगा, उसकी जीत के आसार उतने ही होंगे।
विकास को लेकर सवाल कर रहे मतदाता
मतदाताओं का मिजाज जानने के लिए हम चमन सराय पहुंचे। यहां मिले नसीम खां कहते हैं, चुनावी मैदान में उतरे सभी प्रत्याशी विकास कराने का वादा कर रहे हैं। ऐसे ही वादे पहले भी हुए, जो अधूरे पड़े हैं। ऐसे में मतदाता हर प्रत्याशी को परख रहे हैं। राजनीतिक दल ध्रुवीकरण की कोशिशों में जुटे हुए हैं। हयात नगर के मनोज कुमार भी चुनावी चर्चा छिड़ते ही विकास नहीं होने का सवाल उठाते हैं। वह कहते हैं, जब चुनाव आता है तभी विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य का मुद्दा उठता है। चुनाव खत्म, मुद्दा खत्म...। अब तो सारा ध्यान ध्रुवीकरण पर है। पर, इस बार मतदाता नेताओं के जाल में नहीं फंसने वाले हैं।
2017 का चुनाव परिणाम
इकबाल महमूद, सपा - 79,248
डॉ. अरविंद गुप्ता भाजपा - 59,976
जिया उर्रहमान बर्क एआईएमआईएम - 59,336
रफातुल्ला, बसपा - 36,705
कैसर अब्बास, रालोद - 920
वोटों का गणित
मुस्लिम - 2.30 लाख
अनुसूचित जाति - 50 हजार
सैनी - 32 हजार
ब्राह्मण - 12 हजार
जाट - 11 हजार
वैश्य - 10 हजार
यादव - 5 हजार