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महेश भट्ट की सलाह, असहिष्णुता पर बंद हो बहस

Thu, 03 Dec 2015 02:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 03 Dec 2015 02:48 AM IST
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Mahesh Bhatt says climate change should be discussed.

फिल्म निर्माता महेश भट्ट अब देश में असहिष्णुता पर बहस को जरूरी नहीं मानते हैं। वह कहते हैं, कुदरत का इशारा है कि इनटॉलरेंस के बजाय ग्लोबल वार्मिंग पर चर्चा हो। यह गंभीर मुद्दा है। क्लाइमेट चेंज का खतरा आ चुका है, तमिलनाडु इसका उदाहरण है।

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राजधानी आए महेश भट्ट ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि असहिष्णुता पर संसद में दो दिन की बहस हो चुकी है। काफी दिनों से देश में इस पर चर्चा हो रही थी। चेन्नई त्रासदी गंभीर मुद्दा है।
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अब यह नहीं कहा जा सकता है कि 20 या 50 साल बाद ग्लोबल वार्मिंग का खतरा आएगा। जलवायु परिवर्तन का असर तमिलनाडु में दिख रहा है।

ग्लोबल वार्मिंग, क्लाइमेट चेंज के रूप में बड़ी समस्या सामने हैं लेकिन अभी नजर नहीं पड़ी है। इस पर देश भर में गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा, सामाजिक मुद्दे हम बड़ी शिद्दत से उठाते हैं। बहुत लोग हैं जो जुल्म झेल रहे हैं, उफ तक नहीं करते, विपरीत हालात में भी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, महिलाएं सुरक्षित नहीं है। लेकिन, सामाजिक जुल्म के खिलाफ केवल छाती पीटने से काम नहीं चलेगा। उदाहरण बनना पड़ेगा, समाज में उदाहरण बनने वालों से सीखना होगा।
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'प्यास लग जाए तो व्यक्ति पानी ढूंढ ही लेता है'

Mahesh Bhatt says climate change should be discussed.

महेश भट्ट ने कहा, अपनी जिंदगी में अंधेरा होने के बावजूद दूसरों को उजाला देना होगा। इससे पहले एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यदि आप सपना देख सकते हो तो उसे पूरा कर सकते हैं। प्यास लग जाए तो व्यक्ति पानी ढूंढ लेता है।

यूपी की कहानियों का विमोचन

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और फिल्म प्रोड्यूसर महेश भट्ट ने नीलेश मिश्र की पुस्तक ‘यूपी की कहानियां’ और कंचन पंत की किताब ‘बेबाक’ का विमोचन किया।

गांवों में बसता है स्वाभिमान

इस साल के रमन मैग्सेसे अवार्ड के विजेता अंशु गुप्ता ने हिंदुस्तान के गांवों में स्वाभिमान और आत्मसम्मान बसता है। भिखारी शहर में पाए जाते हैं। भीख गांव का विषय नहीं है। गांव के लोग मुसीबत से निकलकर रास्ता चुनते हैं।

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