महंत परमहंस दास की सुनवाई टली, फिर 14 दिन के लिए भेजे गए जेल, भाजपा व केंद्र पर भड़के
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छह दिसंबर से पहले मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश न लाने पर आत्मदाह करने की धमकी देने के मामले में जेल में निरुद्ध महंत परमहंस दास की जमानत अर्जी पर सुनवाई नहीं हो सकी। अब इसमें अगली पेशी 20 दिसंबर नियत की गई है। महंत परमहंस दास को सुल्तानपुर जेल से लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें फिर से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
फौजदारी के अधिवक्ता विकास कृष्ण त्रिपाठी ने बताया कि महंत परमहंस दास की जमानत पर सोमवार को सुनवाई होनी थी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वरुण मोहित निगम ने पिछली पेशी पर जमानत पर सुनवाई के लिए कोतवाली से मामले की केस डायरी तलब की थी। लेकिन विवेचक के छुट्टी पर होने के कारण कोतवाली से न तो आख्या आ सकी और ना ही केस डायरी। इसलिए मामले में सुनवाई टाल दी गई।
महंत परमहंस दास की न्यायिक अभिरक्षा की अवधि सोमवार को पूरी हो रही थी, इसलिए उन्हें सुल्तानपुर जेल से लाकर सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। वहां से उन्हें फिर से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
शीर्ष नेताओं के इशारे पर हुई मेरी गिरफ्तारी : परमहंस
सुल्तानपुर कारागार से पेशी पर आए स्वामी परमहंस ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भाजपा के शीर्ष नेताओं के इशारे मेरी गिरफ्तारी हुई है। मेरे साथ हुए कृत्य का परिणाम पांच राज्यों में भाजपा की हार के रूप में सामने आया है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के पहले मंदिर निर्माण नहीं शुरू हुआ तो 2019 में भाजपा मुक्त भारत होगा। मुझे जेल भेज कर बीजेपी ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारी है। प्रदेश और केंद्र में भाजपा की सरकार रहते संत धर्माचार्य जेल में हैं।