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'महादानी बिटिया' ने बदल दी पांच परिवारों की जिंदगी, सबने कहा, 'थैंक्यू दीक्षा'

Sun, 14 Aug 2016 05:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 14 Aug 2016 05:29 PM IST
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mahadani diksha gives life to five families.
महादानी बिटिया दीक्षा - फोटो : amar ujala

लिवर, किडनी और आंखें दान कर दीक्षा ने पांच परिवारों की झोली में खुशियां भर दी हैं। ‘महादानी बिटिया’ के लिवर और किडनी को सफलतापूर्वक तीन मरीजों में प्रत्यारोपित कर दिया गया है, जबकि उसकी कॉर्निया का भी ट्रांसप्लांट सफल रहा। इन पांचों मरीजों के परिवार में खुशी का माहौल है।

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उनके अपनों की जिंदगी बिटिया के अंगदान से सुधर रही है। डॉक्टरों का दावा है कि सभी मरीजों की हालत ठीक है, हालांकि उनकी निगरानी की जा रही है। सभी ने कहा ‘थैंक्यू दीक्षा’।
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गोरखपुर, मायाबाजार के अनिल श्रीवास्तव की बेटी दीक्षा (22) इस दुनिया से जाते-जाते पांच लोगों को जीवनदान दे गई। शुक्रवार को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर उसके लिवर को केजीएमयू के शताब्दी अस्पताल से दिल्ली के लिए रवाना किया गया। जबकि किडनी पीजीआई भेजी गई।

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25 वर्षीय महिला को प्रत्यारोपित किया गया लिवर

mahadani diksha gives life to five families.

केजीएमयू के लिवर ट्रांसप्लांट विभाग के डॉ. अभिजीत चंद्रा ने बताया कि रात करीब सवा दस बजे दीक्षा का लिवर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। वहां एयरपोर्ट से वसंतकुंज स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज जाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया था।

ग्रीन कॉरिडोर की मदद से करीब 11 बजे अस्पताल पहुंचे। 11.30 बजे ओटी में बिहार के 25 वर्षीय महिला को लिवर प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू हुई। लिवर प्रत्यारोपण टीम में केजीएमयू के डॉ. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक गुप्ता और आईएलबीएस के डॉ. एसके सरीन, डॉ. पनेचा समेत अन्य डॉक्टरों की टीम रही।

डॉ. अभिजीत और डॉ. विवेक गुप्ता ने बताया कि रात 11 बजे शुरू हुआ प्रत्यारोपण करीब पांच घंटे चला और शनिवार सुबह छह बजे इसे पूरा किया गया।

लिवर प्रत्यारोपण के बाद महिला की ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट में निगरानी चल रही है और उसकी हालत बेहतर है। लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद केजीएमयू के डॉ. अभिजीत चंद्रा और डॉ. विवेक गुप्ता सुबह करीब दस बजे केजीएमयू लौट गए।

बाराबंकी और कानपुर के दो मरीजों को लगी किडनी

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इन्होंने किया सफल प्रत्यारोपण डॉ. मनमीत व डॉ. विवेक - फोटो : amar ujala

दीक्षा की किडनी एसजीपीजीआई में दो मरीजों को प्रत्यारोपित की गई है। संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि केजीएमयू से ऑर्गन डोनेशन और किडनी मिलने की जानकारी के बाद चार मरीजों को कॉल कर बुलाया गया। किडनी और चारों मरीजों की क्रॉस मैचिंग कराई गई तो दो मरीजों की सभी चीजें किडनी से मैच कर गईं।

इसके बाद शनिवार सुबह करीब छह बजे डॉ. राकेश कपूर के नेतृत्व में डॉ. संजय सुरेखा, डॉ. अनीष श्रीवास्तव और केजीएमयू के डॉ. मनमीत सिंह की टीम ने एक किडनी बाराबंकी की 36 वर्षीय महिला जबकि दूसरी किडनी कानपुर के 55 वर्षीय व्यक्ति में प्रत्यारोपित करने की प्रक्रिया शुरू की।

डॉ. मनमीत सिंह ने बताया कि किडनी प्रत्यारोपण दोपहर बारह बजे तक चला। डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि प्रत्यारोपण के बाद दोनों मरीजों की हालत सामान्य है और उम्मीद है कि वे बेहतर रिजल्ट देंगे। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की टीम दोनों मरीजों की निगरानी कर रही है। इसी तरह दीक्षा की कॉर्निया दो मरीजों को प्रत्यारोपित की गई और उनके जीवन में छाया अंधेरा हमेशा के लिए दूर हो गया।

24 घंटे तक जुटे रहे डॉक्टर ऑपरेशन ट्रांसप्लांट पूरा करने में

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डॉ. अभिजीत - फोटो : amar ujala

ब्रेनडेड दीक्षा के अंग निकालना और फिर उसे सफल तरीके से प्रत्यारोपित करने तक डॉक्टर लगातार जुटे रहे। शुक्रवार शाम चार बजे के करीब तय हुआ कि ब्रेनडेड मरीज का ऑगर्न डोनेट करना है। इसके बाद अंग निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई और रात दस बजे तक चली।

लिवर लेकर डॉ. अभिजीत चंद्रा और डॉ. विवेक गुप्ता दिल्ली गए और शनिवार सुबह पांच बजे तक लिवर प्रत्यारोपण में लगे रहे। इसी तरह पीजीआई में किडनी ट्रांसप्लांट टीम में शामिल डॉक्टर ओपीडी कर के घर लौटे तो कुछ घंटों में कैडबर से अंग मिलने की सूचना मिली।

किडनी संस्थान पहुंची तो रात दस बजे मरीजों को बुलाने जांच कराने और क्रॉस मैचिंग का काम शुरू हुआ। शनिवार सुबह छह बजे प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू हुई तो दोपहर बारह बजे तक चली। डॉ. राकेश कपूर और अभिजीत चंद्रा बताते हैं कि दीक्षा के अंग को सफल प्रत्यारोपित करना पहला लक्ष्य था। सफल प्रत्यारोपण के बाद सभी ने राहत की सांस ली।

पंचतत्व में विलीन महादानी दीक्षा

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दीक्षा का शव परिवारीजन करीब ग्यारह बजे केजीएमयू के शताब्दी अस्पताल लेने पहुंचे। इसके बाद उसके अंतिम संस्कार की तैयारी की गई।

मामा शिशिर श्रीवास्तव ने बताया कि पिता अनिल श्रीवास्तव की तो ऐसी हालत है कि वह बेटी को अंतिम विदाई देने घाट तक नहीं जा सके। भाई प्रांजल श्रीवास्तव ने धार्मिक विधि-विधान पूरा किया।

दोपहर करीब साढ़े तीन बजे दीक्षा का बैकुंठ धाम स्थित विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार कर दिया गया। दीक्षा के अंतिम संस्कार में आलमबाग के भोलाखेड़ा के रहने वाले स्थानीय लोगों के साथ परिवार के अन्य सदस्य और रिश्तेदार मौजूद रहे।

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