नेस्ले के गोदाम से 20 हजार किलो मैगी का स्टॉक सीज
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केंद्रीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसए) की टीम ने सोमवार को नेस्ले इंडिया के गोदाम पर छापा मार कर 20 हजार किलो मैगी का स्टाक सीज कर दिया। यह कार्रवाई मैगी पर प्रतिबंध लगने और स्टॉक हटाने के लिए तय अवधि समाप्त होने के बाद की गई। लैब टेस्ट में बच्चों के लिए मैगी खतरनाक पाए जाने के बाद देश भर में मैगी की खरीद-बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध है।
केंद्रीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसए) से आईं नामित अधिकारी डॉ. मनीषा नारायन ने दोपहर बाद एफएसडीए मुख्यालय पर नेस्ले इंडिया कंपनी के बंथरा स्थित रीजनल सेल्स डिपो व वेयर हाउस के निरीक्षण के बारे में जानकारी दी।
एफएसडीए प्रशासन ने मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसपी सिंह की अगुवाई में एफएसओ की टीम गठित कर केंद्रीय मुख्यालय से आई अधिकारी के साथ बंथरा भेजी। बंथरा स्थित नेस्ले इंडिया कंपनी के रीजनल वेयर हाउस पहुंची टीम ने निरीक्षण में पाया कि दो सौ ग्राम से दो किग्रा. तक के मैगी पैकेट निर्देश के बाद भी बिना सील किए डिपो में स्टोर कर रखे हुए हैं।
आवश्यक कागजी औपचारिकता के बाद एफएसडीए टीम ने लगभग बीस हजार किलो मैगी पैकेटों को सीलबंद कर जब्त करने की कार्रवाई शुरू की जो देर शाम तक पूरी हो पाई।
टीम में शामिल अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल इन सीलबंद मैगी पैकेट को वेयर हाउस कक्ष में ही स्टोर कर कमरे को सीज कर दिया गया है। अब केंद्रीय मुख्यालय से मिलने वाले अगले दिशानिर्देश के आधार पर सीज किए गए मैगी स्टॉक को नष्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
मैगी निर्माता कंपनी नेस्ले को भी जारी हुए आदेश
एफएसडीए अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय मुख्यालय ने लैब जांच में मैगी को बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक पाए जाने पर मई 2015 में इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसमें जानलेवा स्तर तक नुकसान पहुंचाने वाले लेड व एमएसजी (मोनोसोडियम ग्लूकामेड) की पुष्टि हुई थी। इसके बाद मैगी के उत्पादन, विक्रय व स्टोरेज को देशव्यापी स्तर पर बैन कर दिया गया था।
निर्माता कंपनी नेस्ले इंडिया को भी दो माह में निर्माण के बाद बिक्री को तैयार व वेयर हाउस में स्टोर मैगी को नष्ट करने का निर्देश दिया गया था। यह समय अवधि पूरी हो जाने के बाद अब केंद्रीय मुख्यालय स्तर से कंपनी द्वारा वेयर हाउस में रखे मैगी स्टाक को नष्ट न किए जाने पर सीज किए जाने की कार्रवाई शुरू की गई है।
घातक एमसीजी के साथ आठ गुना अधिक लेड
देश भर प्रतिबंध से पहले अलग अलग एफएसडीए लैब में जांचे गए मैगी नमूनों में सेहत के लिए घातक व जानलेवा लेड की मात्र तय मानक से सात से आठ गुना तक अधिक मिली थी।
बाराबंकी में सप्लाई हुए जिस बैच की निर्मित मैगी के नमूने की लैब जांच कराई गई थी उसमें लेड की मात्रा 17.2 पार्ट्स पर मिलियन थी जबकि मानक के अनुसार इसकी मात्र 2.7 पार्ट्स पर मिलियन तक ही सुरक्षित व स्वीकार है। इसके साथ ही नमूना मैगी की जांच में एमसीजी (मोनोसोडियम ग्लूकामेड) भी बिना वैधानिक चेतावनी के मिला था।