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बाबू का एक और कारनामा, भू-माफिया ने अलीगंज में बेच दिया एलडीए का भूखंड
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एलडीए में एक और घपला आया सामने। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
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एलडीए की अलीगंज योजना में अब जाली दस्तावेज से रजिस्ट्री करा भूखंड बेचने का नया मामला पकड़ा गया है। यहां सेक्टर डी, अलीगंज में 1250 वर्गफीट के भूखंड की रजिस्ट्री भी निबंधन कार्यालय में खुद एलडीए के जेल जा चुके बाबू पवन गौतम द्वारा ही कराई गई थी।
यह 14वीं संपत्ति है जिसकी रजिस्ट्री बिना आवंटन व पैसा जमा कराए बाबू ने निबंधन कार्यालय में करा दी। वीसी अक्षय त्रिपाठी ने प्रकरण में मुकदमा कराने का आदेश सोमवार को कर दिया।
प्रकरण के मुताबिक, भू-माफिया ने भूखंड संख्या 45, सेक्टर डी की रजिस्ट्री महावीर सिंह के नाम कराई है। इसे रीसेल किया जा रहा था। एडवांस दे चुका एक व्यक्ति रजिस्ट्री की कॉपी लेकर पूछताछ करने एलडीए पहुंचा था।
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बाबू अनिल मेहरोत्रा ने हस्ताक्षर संदिग्ध देखकर फोटोकॉपी ले ली। डिस्पोजल रजिस्टर और दूसरे रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि इस भूखंड का आवंटन एलडीए से नहीं किया गया है।
यह रजिस्ट्री पवन कुमार गौतम द्वारा जाली तरीके से कराई गई। इसकी कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई गई है। एलडीए में इसके लिए कोई राशि भी जमा नहीं है। कंप्यूटर में भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है।
15 सितंबर को हुई रजिस्ट्री
शुरूआती जांच में सामने आया है कि यह रजिस्ट्री पवन कुमार गौतम ने 15 सितंबर 2021 को कराई। इसके आसपास ही पूर्व में पकड़े गए 13 अन्य प्रकरण में भी रजिस्ट्री बाबू ने कराई थी। उस समय भी गोमतीनगर योजना के भूखंड पकड़े गए थे। गोमतीनगर से बाहर की योजना में पहली बार यह फर्जीवाड़ा मिला है। मौके पर भूखंड अभी खाली है। ऐसे में आशंका जताई गई है कि जाली दस्तावेज से रजिस्ट्री करा भूखंड कब्जाने की तैयारी भू-माफिया की थी। अब वीसी ने भूखंड पर कब्जा लेने के लिए अधिकारियों को कहा है।
आनंद सिंह के हस्ताक्षर बना रजिस्ट्री
एलडीए के पूर्व नजूल अधिकारी अब वर्तमान में एसडीएम सरोजनीनगर आनंद सिंह के हस्ताक्षर से यह रजिस्ट्री कराई गई है। अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा का कहना है कि उनके हस्ताक्षर का भी मिलान कराया जा रहा है जिससे सच्चाई पता चल सके। संपत्ति विभाग के अनुभाग अधिकारी को एफआईआर कराने के निर्देश दिए हैं।
लापरवाही : अभी तक सूची ही नहीं मांगी
अलीगंज में बेचे गए इस भूखंड के साथ एलडीए के अफसरों की बड़ी लापरवाही भी सामने आ गई है। 8 अक्तूबर को 13 भूखंड व भवन में जाली दस्तावेज से रजिस्ट्री की बात सामने आने के बाद अधिकारियों को निबंधन कार्यालय से आरोपी बाबू पवन गौतम के कार्यकाल जुलाई से सितंबर के बीच हुई सभी रजिस्ट्री की जानकारी लेनी थी। इन रजिस्ट्री और संपत्तियों की सूचना पता करने के लिए पत्र ही कभी नहीं भेजा गया। ऐसे में कोई सूचना भी निबंधन कार्यालय ने नहीं दी। सोमवार को अब अपर सचिव ने रजिस्ट्री सेल को पत्र भेजने का आदेश दिया है।
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यह 14वीं संपत्ति है जिसकी रजिस्ट्री बिना आवंटन व पैसा जमा कराए बाबू ने निबंधन कार्यालय में करा दी। वीसी अक्षय त्रिपाठी ने प्रकरण में मुकदमा कराने का आदेश सोमवार को कर दिया।
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प्रकरण के मुताबिक, भू-माफिया ने भूखंड संख्या 45, सेक्टर डी की रजिस्ट्री महावीर सिंह के नाम कराई है। इसे रीसेल किया जा रहा था। एडवांस दे चुका एक व्यक्ति रजिस्ट्री की कॉपी लेकर पूछताछ करने एलडीए पहुंचा था।
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बाबू अनिल मेहरोत्रा ने हस्ताक्षर संदिग्ध देखकर फोटोकॉपी ले ली। डिस्पोजल रजिस्टर और दूसरे रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि इस भूखंड का आवंटन एलडीए से नहीं किया गया है।
यह रजिस्ट्री पवन कुमार गौतम द्वारा जाली तरीके से कराई गई। इसकी कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई गई है। एलडीए में इसके लिए कोई राशि भी जमा नहीं है। कंप्यूटर में भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है।
15 सितंबर को हुई रजिस्ट्री
शुरूआती जांच में सामने आया है कि यह रजिस्ट्री पवन कुमार गौतम ने 15 सितंबर 2021 को कराई। इसके आसपास ही पूर्व में पकड़े गए 13 अन्य प्रकरण में भी रजिस्ट्री बाबू ने कराई थी। उस समय भी गोमतीनगर योजना के भूखंड पकड़े गए थे। गोमतीनगर से बाहर की योजना में पहली बार यह फर्जीवाड़ा मिला है। मौके पर भूखंड अभी खाली है। ऐसे में आशंका जताई गई है कि जाली दस्तावेज से रजिस्ट्री करा भूखंड कब्जाने की तैयारी भू-माफिया की थी। अब वीसी ने भूखंड पर कब्जा लेने के लिए अधिकारियों को कहा है।
आनंद सिंह के हस्ताक्षर बना रजिस्ट्री
एलडीए के पूर्व नजूल अधिकारी अब वर्तमान में एसडीएम सरोजनीनगर आनंद सिंह के हस्ताक्षर से यह रजिस्ट्री कराई गई है। अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा का कहना है कि उनके हस्ताक्षर का भी मिलान कराया जा रहा है जिससे सच्चाई पता चल सके। संपत्ति विभाग के अनुभाग अधिकारी को एफआईआर कराने के निर्देश दिए हैं।
लापरवाही : अभी तक सूची ही नहीं मांगी
अलीगंज में बेचे गए इस भूखंड के साथ एलडीए के अफसरों की बड़ी लापरवाही भी सामने आ गई है। 8 अक्तूबर को 13 भूखंड व भवन में जाली दस्तावेज से रजिस्ट्री की बात सामने आने के बाद अधिकारियों को निबंधन कार्यालय से आरोपी बाबू पवन गौतम के कार्यकाल जुलाई से सितंबर के बीच हुई सभी रजिस्ट्री की जानकारी लेनी थी। इन रजिस्ट्री और संपत्तियों की सूचना पता करने के लिए पत्र ही कभी नहीं भेजा गया। ऐसे में कोई सूचना भी निबंधन कार्यालय ने नहीं दी। सोमवार को अब अपर सचिव ने रजिस्ट्री सेल को पत्र भेजने का आदेश दिया है।