Ateek Ahmad : माफिया अतीक के बेटे ने कोर्ट में किया सरेंडर, मोहित को अगवाकर जेल में मारपीट करने का मामला
माफिया अतीक अहमद के बेटे मोहम्मद उमर अहमद ने मंगलवार को सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया। उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था।
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लखनऊ के प्रॉपर्टी डीलर मोहित जायसवाल को अगवा करके लखनऊ से देवरिया जेल ले जाकर मारपीट करने के आरोपी मो. उमर ने मंगलवार को कोर्ट में समर्पण कर दिया। माफिया अतीक अहमद का बेटा उमर ढाई लाख रुपये का इनामी था। सीबीआई की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट समृद्धि मिश्रा ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी। इस मामले में माफिया अतीक समेत अन्य लोगों का मामला सत्र न्यायालय के सुपुर्द किया जा चुका है।
पत्रावली के अनुसार कारोबारी मोहित ने 28 दिसंबर, 2018 को कृष्णानगर थाने में इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि देवरिया जेल में बंद अतीक ने अपने गुर्गों से गोमतीनगर स्थित ऑफिस से उसका अपहरण करवा लिया। देवरिया जेल में ले जाकर उससे मारपीट की। सादे पन्ने पर दस्तखत करने से इनकार किया तो अतीक, उसके बेटे उमर और गुरफान, फारुख, गुलाम व इरफान ने उसे तमंचे व लोहे की रॉड से बुरी तरह पीटा। यह भी आरोप लगाया कि उससे स्टाम्प पेपर पर जबरन हस्ताक्षर बनवाकर 45 करोड़ की संपत्ति अपने नाम करा ली।
वारंट जारी होने के बाद भी कोर्ट नहीं पहुंचा
बाद में मामला सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया। सीबीआई ने 12 जून 2019 को मामले की विवेचना शुरू की थी। कारोबारी मोहित जायसवाल मामले में आरोपी उमर की संलिप्तता पाते हुए उसके खिलाफ 31 दिसंबर 2020 को चार्जशीट दायर की। सीबीआई कोर्ट ने 22 जनवरी 2021 को उमर का गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। उमर कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ तो 23 फरवरी 2021 को उसे फरार घोषित किया गया। बाद में शासन ने उस पर ढाई लाख का इनाम घोषित कर दिया।
मोहम्मद उमर पर घोषित है दो लाख का इनाम
काफी तलाश के बाद भी नहीं मिलने पर उमर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कराया गया। इसके कुछ दिनों बाद उस पर सीबीआई की ओर से दो लाख का इनाम घोषित किया गया लेकिन फिर भी वह हाथ नहीं आया। नाम न छापने की शर्त पर एक अफसर ने बताया कि उमर अपहरण कर जेल में पिटाई, रंगदारी समेत कई गंभीर धाराओं में दर्ज मामले का आरोपी है। उमर का पिता अतीक अहमद कुख्यात माफिया है और उसका चाचा अशरफ भी अपराधी है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि हिस्ट्रीशीट खोलकर उसकी निगरानी की जाए। सूत्रों का कहना है कि अफसरों के निर्देश पर खुल्दाबाद पुलिस ने इस संबंध में दस्तावेज जुटाने का काम भी शुरू कर दिया है।
उमर के खिलाफ मिले थे फोरेंसिक साक्ष्य
मोहित जायसवाल केस की जांच के दौरान सीबीआई को उमर के खिलाफ फोरेंसिक साक्ष्य मिले थे। सीडीआर और टॉवर लोकेशन से यह पता चला था कि घटना के वक्त उसकी मोबाइल लोकेशन देवरिया जेल के इलाके में ही थी। एक खास बात यह भी रही कि जमानत प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किए जाने के दौरान उमर की ओर से उसके वकीलों ने यह बात स्वीकार की थी कि घटना वाले दिन वह परिजनों को साथ लेकर अपने पिता से मिलने देवरिया जेल गया था लेकिन सीबीआई की ओर से बताया गया था कि उसे जांच के दौरान ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, जिसमें जेल प्रशासन ने उमर को जेल के भीतर जाने की अनुमति दी हो।
नोएडा से कर रहा था कानून की पढ़ाई
24 साल का उमर नोएडा के एक निजी लॉ कॉलेज का छात्र रहा है। खास बात यह है कि कृष्णा नगर पुलिस की ओर से जो चार्जशीट दाखिल की थी उसमें उसका नाम नहीं था। उसके वकीलों की ओर से कोर्ट में जो जमानत प्रार्थनपत्र दिया गया था, उसमें दावा किया गया था कि उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।