Lucknow News: छोटी काशी है लखनऊ का चाैक, हर घर में शिवलिंग
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लखनवी खानपान की लज्जत दुनिया भर में मशहूर है। चाैक की गलियों में सबसे जायकेदार खाना मिलता है। यहां की कुजीन पर ईरानी और मुगलिया प्रभाव मिलता है। यह लब्बोलुआब है कोसल लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित लखनवी तहजीब, खानपान और सांस्कृतिक विरासत पर हुई चर्चा का। इस सत्र में नवाब मसूद अब्दुल्ला, वरिष्ठ लेखक व पत्रकार नवल कांत सिन्हा, आशुतोष दीक्षित और रिद्धि गौर के बीच बातचीत हुई। नवल कांत सिन्हा ने कहा कि लखनऊ शहर स्वाद, सेहत और आध्यात्मिकता का संगम है। नवाब मसूद अब्दुल्ला ने पान की अदबी विरासत पर प्रकाश डाला।
अगले सत्र में वरिष्ठ पत्रकार ज्योत्सना मोहन और वरिष्ठ पत्रकार शैल्वी शारदा ने भारतीय मीडिया के बदलते स्वरूप पर चर्चा की। अगले सत्र में आरजे प्रतीक की मेजबानी में सोशल मीडिया के युवा चेहरों सौभाग्य दीक्षित, आकांक्षा अवस्थी और सौरभ चंद्रा ने डिजिटल दुनिया के अनुभव साझा किए। आकांक्षा अवस्थी ने शहर के स्ट्रीट फूड को लखनऊ की सच्ची पहचान बताया।
काव्यरस और शब्दों में महका लखनऊ
अगले सत्र ‘पोएटिक व्हिस्पर्स’ में मोनिया अलजलाइस, अब्बास रजा नैयर और चंद्रशेखर वर्मा की मौजूदगी ने शाम को काव्य-रस से सराबोर किया। उर्दू शायरी, गजल और अदब की नर्मी ने लखनऊ को एक भावनात्मक, महकती और यादों से भरे शहर के ताैर पर पेश किया।
लौट आए सभी किरदार कहानी की तरफ...
लखनऊ। कोसल लिटरेचर फेस्टिवल की दूसरी शाम शुक्रवार को देश के मशहूर शायरों के नाम रही। शायरी की महफिल जमी तो एक से एक नायाब कलामों पर तालियां सीढि़यों की मानिंद चढ़ती-उतरती रहीं। गुलाबी ठंड के बीच यूपी दर्शन पार्क में हाथों का आपस में मधुर ताल के साथ स्पर्श गर्माहट भी बढ़ा रहा था। महफिल का आगाज शहर के मशहूर शायर अभिषेक शुक्ला से हुआ। संचालन अजहर इकबाल ने और सदारत मशहूर शायर वसीम बरेलवी ने की। अभिषेक शुक्ला ने जैसे ही एक शेर सामने बैठे श्रोताओं की ओर उछाला तो तालियां खुद-ब-खुद महफिल में संगीत की तरह बजने लगीं। उन्होंने पढ़ा- करम कर मेरे माैसमों पर जाते हुए, कि धूप धूप रहे साया साया रहे। इसके बाद उन्होंने पढ़ा- हर्फ लफ्जों की तरफ लफ्ज मआ’नी की तरफ, लौट आए सभी किरदार कहानी की तरफ, पहले मिसरे में तुझे सोच लिया हो जिसने, जाना पड़ता है उसे मिसरा-ए-सानी की तरफ। फेहरिस्त आगे बढ़ी तो शायरा हिना रिजवी, शायर अजहर इकबाल, मकबूल शायर फरहत एहसास, शारिक कैफी और शायर वसीम बरेलवी ने अपने मुख्तलिफ अंदाज-ए-बयां से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।

कोसल लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन की झलकियां।

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