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Lucknow News: सात दिन में पक जाएगा लखनवी दशहरी आम

Sun, 25 May 2025 01:40 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Sun, 25 May 2025 01:40 AM IST
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Lucknowi Dussehri mango will ripen in seven days
लखनऊ। लखनवी दशहरी, चौसा और लंगड़ा आम की मांग देश और विदेश में लगातार बनी हुई है। विशेषज्ञ बताते हैं कि लखनवी मलिहाबादी आम को पकने में हफ्तेभर का समय और लगेगा, जिसके बाद जून के पहले हफ्ते से आम का निर्यात शुरू हो जाएगा। लखनऊ से सबसे ज्यादा आम खाड़ी देश और यूरोप में सबसे ज्यादा होता है। अच्छी फसल से इस बार किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद है। क्योकि, पिछले तीन सालों में निर्यात कमजोर हुआ है।
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मौसम और जलवायु के हिसाब से प्रदेश भर के अलग-अलग क्षेत्रों में आम की मेच्योरिटी में करीब 10 दिन का अंतर है। प्रतापगढ़ के आम की मेच्योरिटी जहां पूरी हो गई है। वहीं, लखनवी आम की मेच्योरिटी पूरी होने में हफ्ताभर का समय और है। आम के निर्यात से जुड़े निर्यातक अकरम बेग बताते हैं कि प्रतापगढ़ के आम की मेच्योरिटी आ गई है, जिसका अगले दो दीन दिन में 26 मई से निर्यात शुरू हो जाएगा। वहीं, लखनऊ के आमों के निर्यात में अभी 10 दिन लगेंगे। बताया कि एक जून से मंडी ही शुरू होती है, जिसमें दिल्ली के लिए लोडिंग होना शुरू हो जाती है। लखनऊ से आम का निर्यात पांच जून से शुरू हो सकेगा। बताया कि इस बार फसल अच्छी हुई है। इसके अलावा आम पर बैगिंग (मैंगो प्रोटेक्शन बैग) लगाई गई है। इससे अच्छी गुणवत्ता की पैदावार होने और किसानों को पिछले सालों के मुकाबले अच्छी कीमत की उम्मीद बंधी है।
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शनिवार को डीएम विशाख ने काकोरी रहमानखेड़ा स्थित केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, मैंगो पैक हाउस का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मंडी सचिव ने बताया कि पैक हाउस के संचालन के लिए क्यू 9 संस्था को टेंडर दिया गया है। जून के प्रथम सप्ताह से अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से पैकेजिंग व निर्यात की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस प्लांट में एक बार में 16 टन आम की प्रोसेसिंग होती है।
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साल- आम का निर्यात (किग्रा)



(2022-23) शून्य

(2023-24) 19,199



(2024-25) 3,975







मैंगो पल्प की फैक्टरी लगे तो किसानों को और हो फायदा

आम के निर्यातक अकरम बेग बताते हैं कि क्वालिटी बेहतर न होने के कारण भी पिछले कुछ सालों में निर्यात में कमी आई है। अगर मैंगो पल्प बन सके तो किसानों के तमाम नुकसान की भरपाई हो सकेगी। क्योंकि, प्रदेश में एक भी मैंगो पल्प की फैक्टरी नहीं है। वहीं, पिछली बार के मुकाबले इस बार जहाजों के किराये में भी वृद्धि हुई है। हालांकि, सरकार निर्यातकों को किराये पर 25 फीसदी की सब्सिडी भी देती है। लंदन भेजने के लिए किराया 220 रुपया प्रति किलो लगता है जो कि पहले कम होता था।
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