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Lucknow News: लविवि ने जारी की नई एसओपी, हर फाइल के लिए तय हुई समय-सीमा

Sun, 14 Jun 2026 01:24 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jun 2026 01:24 AM IST
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Lucknow University issues new SOP; time limits set for every file.
लविवि
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय ने अकादमिक अनुसंधान और तकनीकी विकास से जुड़ी परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। नई व्यवस्था का उद्देश्य शोध कार्यों को प्रशासनिक देरी से मुक्त करते हुए प्रस्तावों की प्रस्तुति, वित्तीय स्वीकृतियों और रिपोर्टिंग को पारदर्शी तथा डिजिटल बनाना है।
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कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि एसओपी शोधकर्ताओं और मुख्य अन्वेषकों को पारदर्शी कार्य वातावरण उपलब्ध कराएगी। डिजिटल प्रणाली के एकीकरण से फाइलों के लंबित रहने की समस्या कम होगी और परियोजनाओं की प्रगति पर प्रभावी निगरानी संभव हो सकेगी।
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नई व्यवस्था में परियोजना स्वीकृति से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट चरणों और निर्धारित समय-सीमा में बांटा गया है। सभी गतिविधियों की डिजिटल ट्रैकिंग होगी। मुख्य अन्वेषकों को फंड उपयोग का विवरण और संबंधित बीजक समर्थ पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। इससे अनुसंधान परियोजनाओं को मिलने वाले कोष के वितरण में अनावश्यक विलंब नहीं होगा।
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मानव संसाधन और खरीद प्रक्रिया में बढ़ेगी पारदर्शिता
परियोजनाओं के तहत जूनियर रिसर्च फेलो और प्रोजेक्ट स्टाफ की नियुक्ति के लिए पांच सदस्यीय चयन समिति गठित की जाएगी। इसमें संबंधित संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, मुख्य अन्वेषक, बाहरी विशेषज्ञ और उपकुलसचिव (प्रोजेक्ट) शामिल होंगे। उपकरणों और सामग्रियों की खरीद में सरकारी नियमों का पालन अनिवार्य होगा। 50 हजार रुपये से अधिक की खरीद जेम पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जबकि 10 लाख रुपये से अधिक की खरीद के लिए ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया अपनाई जाएगी।


दो दिन से अधिक नहीं रुकेगी फाइल

प्रशासनिक देरी रोकने के लिए विभिन्न स्तरों पर फाइल निस्तारण की समय-सीमा तय की गई है। विभागाध्यक्ष और रजिस्ट्रार स्तर पर प्रस्तावों को एक से दो दिन के भीतर आगे बढ़ाना होगा। वेंडरों के बिल और शोधार्थियों की फेलोशिप संबंधी फाइलें अधिकतम तीन से सात दिनों में संसाधित की जाएंगी। 50 हजार रुपये से अधिक के बिलों पर कुलपति की अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति आवश्यक होगी। वहीं, वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर उपयोगिता प्रमाण पत्र सात से दस दिनों के भीतर सत्यापित कर संबंधित एजेंसियों को भेजे जाएंगे।
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