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एलयू ट्रकों में लाद कर कहां भेज रहा है एग्जाम्स की कॉपियां, पढें खबर
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Sat, 18 Feb 2017 11:51 AM IST
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लखनऊ यूनिवर्सिटी
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लखनऊ विश्वविद्यालय के जिन एग्जाम्स के रिजल्ट घोषित हुए अभी एक साल भी नहीं हुआ, उनकी कॉपियों को रद्दी में बेचा जा रहा है। विवि प्रशासन ने पिछले साल कंडक्ट किए गए सभी एग्जाम्स की कॉपियों को बेचने का टेंडर कबाड़ी को दे दिया है।
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जबकि एग्जाम की कॉपियों को कम से कम तीन वर्ष तक संभाल कर रखना होता है, ताकि यदि कोई छात्र सूचना के अधिकार के तहत कभी कॉपी देखना चाहे तो वह उपलब्ध हो। वहीं, विश्वविद्यालय इस संबंध में अपना तर्क दे रहा है।
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एलयू इन दिनों बड़ी संख्या में एग्जाम की कॉपियों को बेचने में लगा हुआ है। ये उन एग्जाम्स की कॉपियां हैं, जो पिछले वर्ष तक कंडक्ट किए गए थे। ये सभी वार्षिक परीक्षाओं की कॉपियां हैं, जिनका एग्जाम के बाद रिजल्ट डिक्लेयर हो चुका है।
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इन सभी कॉपियों को एकेडमिक ब्लॉक में स्टोर कर रखा गया है। पिछले दो दिनों से इन कॉपियों को ट्रकों में लाद कर उन्नाव भेजा जा रहा है। बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन्हें बेचने के लिए किसी कबाड़ कारोबारी को टेंडर दिया है।
इन कॉपियों को बेचने के पीछे विश्वविद्यालय अपना नियम बता रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि कॉपियों को रिजल्ट डिक्लेयर होने के बाद तीन महीने तक ही रखने का नियम है।
हर साल परीक्षाएं होती हैं। ऐसे में लाखों की संख्या में कॉपियों को रखने के लिए जगह नहीं रहती। ऐसी स्थिति में अगली परीक्षा शुरू होने से पहले इन्हें बेचना पड़ता है।
विवि जहां रिजल्ट डिक्लेयर होने से तीन महीने तक ही कॉपियों को स्टोर करने की बात कह रहा है, वहीं बाकी शिक्षक विवि प्रशासन के इस तर्क को दरकिनार कर रहे हैं।
कोर्स खत्म होने तक रखनी होती है कॉपियां
डेमो
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शिक्षकों के अनुसार कॉपियों को कोर्स खत्म होने तक स्टोर कर रखना चाहिए। यदि यूजी की कॉपियां हैं तो तीन वर्ष तक और यदि पीजी की कॉपियां है तो दो वर्ष तक स्टोर करना चाहिए।
कोर्स खत्म होने से पहले बीच में किसी भी वर्ष में छात्र सूचना के अधिकार के तहत अपनी कॉपी देखने की डिमांड कर सकता है। दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसको लेकर छात्र को कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी।
ऐसी स्थिति में कोर्ट ने छात्र हित में अपना फैसला सुनाया था। वहीं यूनिवर्सिटी ने जिन कॉपियों को कबाड़ी को बेचा है उनमें काफी संख्या में यूजी के फर्स्ट ईयर की भी है। यदि अभी किसी छात्र ने सूचना का अधिकार दाखिल कर दिया है तो अधिकारियों को बगले झांकना पड़ेगा।
शिक्षकों के अनुसार विवि का यह कदम छात्रहित में नहीं हैं। विवि का तर्क है कि लाखों की संख्या में कापियों को स्टोर करने का साधन नहीं है। करीब 18 हजार छात्र विवि में पढ़ते हैं।
ऐसे में हर साल इनकी कॉपियों को स्टोर करना एक बड़ी समस्या हैं। अगली परीक्षा से पहले पुरानी कॉपियों को डिस्पोज करना ही पड़ेगा। जबकि शिक्षकों के अनुसार विवि के पास स्थान की कमी नहीं है। कहीं पर भी कॉपियों को स्टोर करने के लिए अलग से भवन का निर्माण किया जा सकता है।
‘नियमानुसार ही कॉपियों को बेचा रहा है। रिजल्ट डिक्लेयर होने के बाद तीन महीने तक ही स्टोर करने का नियम है। यदि कोई मामला कोर्ट में है तो केवल उसकी कॉपियों को लंबे समय तक स्टोर कर रखा जाता है।’ -प्रो. एके शर्मा, परीक्षा नियंत्रक
कोर्स खत्म होने से पहले बीच में किसी भी वर्ष में छात्र सूचना के अधिकार के तहत अपनी कॉपी देखने की डिमांड कर सकता है। दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसको लेकर छात्र को कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी।
ऐसी स्थिति में कोर्ट ने छात्र हित में अपना फैसला सुनाया था। वहीं यूनिवर्सिटी ने जिन कॉपियों को कबाड़ी को बेचा है उनमें काफी संख्या में यूजी के फर्स्ट ईयर की भी है। यदि अभी किसी छात्र ने सूचना का अधिकार दाखिल कर दिया है तो अधिकारियों को बगले झांकना पड़ेगा।
शिक्षकों के अनुसार विवि का यह कदम छात्रहित में नहीं हैं। विवि का तर्क है कि लाखों की संख्या में कापियों को स्टोर करने का साधन नहीं है। करीब 18 हजार छात्र विवि में पढ़ते हैं।
ऐसे में हर साल इनकी कॉपियों को स्टोर करना एक बड़ी समस्या हैं। अगली परीक्षा से पहले पुरानी कॉपियों को डिस्पोज करना ही पड़ेगा। जबकि शिक्षकों के अनुसार विवि के पास स्थान की कमी नहीं है। कहीं पर भी कॉपियों को स्टोर करने के लिए अलग से भवन का निर्माण किया जा सकता है।
‘नियमानुसार ही कॉपियों को बेचा रहा है। रिजल्ट डिक्लेयर होने के बाद तीन महीने तक ही स्टोर करने का नियम है। यदि कोई मामला कोर्ट में है तो केवल उसकी कॉपियों को लंबे समय तक स्टोर कर रखा जाता है।’ -प्रो. एके शर्मा, परीक्षा नियंत्रक