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लखनऊ: जेपीएनआईसी घोटाले की जांच तेजी, एलडीए के दो इंजीनियर तलब; सात जुलाई को मंडलायुक्त के सामने होंगे पेश

Fri, 26 Jun 2026 06:14 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Fri, 26 Jun 2026 06:14 PM IST
सार

जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर परियोजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। दो पूर्व अभियंताओं को सात जुलाई को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए तलब किया गया है। आरोप है कि उन्होंने स्वीकृत परियोजना सीमा से बाहर कार्य और अतिरिक्त खर्च की मंजूरी दी। जांच रिपोर्ट के बाद आगे कार्रवाई होगी।

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Lucknow: Probe into JPNIC scam accelerates; two LDA engineers summoned; to appear before the Divisional Commis
जेपीएनआईसी घोटाले - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) प्रोजेक्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। शासन के निर्देश पर चल रही विभागीय कार्रवाई के तहत एलडीए के तत्कालीन मुख्य अभियंता (विद्युत यांत्रिक) दिनेश प्रताप सिंह और अधिशासी अभियंता पूरन कुमार को सात जुलाई को मंडलायुक्त के सामने व्यक्तिगत सुनवाई के लिए तलब किया गया है। जिससे इन इंजीनियरों को जवाब तलब किया जाएगा।

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एलडीए के दोनों इंजीनियरों पर आरोप हैं कि उन्होंने शासन से स्वीकृत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की सीमा से बाहर जाकर बिना अनुमति के अतिरिक्त कार्य कराए। यह भी आरोप है कि उन्होंने निर्धारित राशि से अधिक की निविदाएं स्वीकृत कर अनुबंध किए, जिसके कारण बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं। 
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इन्हीं गंभीर आरोपों के मद्देनजर साल 2018 में विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी, जो अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अधिशासी अभियंता रहे पूरन कुमार के विरुद्ध उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण केंद्रीकृत सेवा नियमावली के तहत जांच जारी है, जबकि तत्कालीन मुख्य अभियंता डीपी सिंह के विरुद्ध केंद्रीय सिविल सेवा के अनुच्छेद-351ए के तहत कार्रवाई की जा रही है क्योंकि यह साल 2017 में सेवानिवृत्त हो गए हैं। 
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इस नियम में दोष साबित होने पर सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन और ग्रेच्युटी में कटौती या वापस लिया जा सकता है। जांच पूरी करने से पहले दोनों अधिकारियों को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए समय दिया गया है। सात जुलाई को आयुक्त कार्यालय में होने वाली व्यक्तिगत सुनवाई के उपरांत, जांच अधिकारी अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे। इस रिपोर्ट में प्रस्तुत तथ्यों और बयानों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, जिसमें दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक या कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

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